Wednesday, January 10, 2018

ध्वनि प्रदूषण का बढ़ता प्रभाव और रोकथाम पर विशेष लेख भोला नाथ मिश्रा की कलम से

इस समय सारी दुनिया में प्रदूषण एक गंभीर जानलेवा समस्या बनती जा रही है और प्रदूषण के चलते हमारा प्राकृतिक स्वरूप बदलता तथा मानव जीवन के भविष्य के लिए खतरा बनता जा रहा है। पूरी दुनिया प्रदूषण को आगे बढ़ने से रोकने के लिए तरह तरह के यत्न प्रयास कर रही है और करोड़ों अरबों रुपये खर्च कर रही है।इस प्रदूषण के अन्तर्गत ध्वनि प्रदूषण का विशेष महत्व होता है क्योंकि यह वर्तमान और भविष्य दोनों के जीवन के खतरनाक साबित हो रहा है।इस समय ध्वनि विस्तारक यन्त्र यानी लाउडस्पीकर एवं उच्च शक्ति के डबल आवाज वाले स्पीकरों डेगों का एक रिवाज सा हो गया है। हर मंदिर मस्जिद में लाउडस्पीकर लगें हैं और हर गतिविधियों में उनका इस्तेमाल होता है।लगता है कि भगवान या अल्लाह मिंया बहरे हो गये.हैं और बिना तेज कानफोड़ू आवाज के वह आवाज सुन ही नही पाते हैं।
गाँव हो चाहे शहर हो तेज तरह तरह के बाजों की आवाज जनमानस की नींद हराम कर रही है और जल्दी ऐसा कोई दिन या रात नहीं होती है जब वातावरण शांत हो। हर समय हर पल हर जगह ध्वनि प्रदूषण सालता रहता है।इस समय शादी निकाह या अन्य धार्मिक सांस्कृतिक समाजिक कार्यक्रमों बैठकों सभाओं में ध्वनि प्रदूषण के बाप डीजे से धरती हिलने लगी है। डीजे नये जमाने का सुपरहिट बाजा बनकर गया है।डीजे की हाईफाई ध्वनि से दिल धड़कने और बैठने लगता है और कभी कभी जान भी चली जाती है।इस समय हर अमीर गरीब शादी या अन्य शुभ अवसरों पर डीजे की व्यवस्था प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले करता है और बारात में तो यह डीजे पायलट बनकर बारात के साथ आगे आगे चलता है।घर से बारात निकलते ही डीजे की धूम शुरू हो जाती है जो रास्ते भर में तहलका मचाते हुए अपने गनतव्य तक पहुंचती है।वह पर भी डीजे की धूम बंद नहीं बल्कि तेज.हो जाती है ताकि गाँव वाले ही नहीं बल्किआसपास गाँव वालों को पता चल जाय कि हनकदार बारात आ गयी है। बाराती डीजे की आवाज दो किमी की परिधि में गूंजती और कमजोर दिल वालों की जान का खतरा बनती है।लगातार ध्वनि प्रदूषण से दिल के रोगी ही नहीं बल्कि बच्चों की पढ़ाई अस्पतालों के मरीज प्रभावित होते हैं।ऐसा नहीं है कि ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए कोई कानून नहीं बना है लेकिन कानून का इस्तेमाल आज की राजनीति के चलते नहीं हो पा रहा है।वर्ष 2000 में बने ध्वनि प्रदूषण नियम में स्पष्ट किया गया है कि किस क्षेत्र में कितनी शक्ति की ध्वनि का इस्तेमाल किया जा सकता है इसके बावजूद हर क्षेत्र में उच्च शक्ति की ध्वनि का इस्तेमाल किया जाता है। प्रशासन इसे धार्मिक एवं शुभ मांगलिक आस्था के नाम पर गौर नही करता है क्योंकि इस समय राजनीति में इस पर रोक लगाने का मतलब अपने हाथों अपने पैर कुल्हाड़ी जैसा है। यहीं कारण है कि ध्वनि प्रदूषण दिनों दिन जोर मारता जा रहा है अगर इसे समय रहते नियन्त्रित नहीं किया जाता है तो जनमानस के जीवन लिए खतरा बढ़ जायेगा। सरकार ने चुनावी ध्वनि प्रदूषण को तो नियन्त्रित कर लिया है लेकिन सार्वजनिक ध्वनि प्रदूषण पर रोक  नही लगा पा रही है।उच्च न्यायालय के कड़े रुख के बाद सरकार और प्रशासन दोनों इस दिशा में सक्रिय हुये हैं। यह सक्रियता ध्वनि प्रदूषण की दिशा में कितनी कारगर होगी यह भविष्य के गर्भ में छिपा है लेकिन बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को रोकना आवश्यक है क्योंकि इस समय दिल के रोगियों की तादाद साठ से सत्तर फीसदी तक पहुंच गई है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भवः स्वः --------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
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          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
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