Monday, January 1, 2018

भारतीय नववर्ष बनाम अंग्रेजी नववर्ष विषेस-भोला नाथ मिश्रा की कलम से

पिछले पाँच वर्षों से लगातार हमसे जुड़े इंटरनेट की दुनिया के दोस्तों , अग्रजों, शुभचिंतकों,अधिकारियों कर्मचारियों राजनेताओं, परिजनों, पुरजनों, को हम दिल की गहराइयों से अंग्रेजी नववर्ष पर पर हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए आप सबकी सलामती खुशहाली के लिए ईश्वर से कामना करते हैं।साथियों आप सभी साथियों को हम बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार व्यक्त करते हैं कि आप सभी रोजाना हमारी सम्पादकीय को पढ़कर हमारा उत्साहवर्धन ही नहीं करते हैं बल्कि हमारी सम्पादकीय को अन्य ग्रुपों फेशबुक बेबसाइट पोर्टल के साथ अखबारों आदि में भी प्रमुखता से स्थान भी दे रहे हैं।नये अंग्रेजी सन् ईस्वीं पर अपने सभी साथियों के मंगल भविष्य की कामना करते हैं और उनके साथ ही देश प्रदेश गाँव के लोगों के सुखमय जीवन की प्रार्थना करते हैं।
साथियों! बीता हुआ साल हर दृष्टि से महत्वपूर्ण एतिहासिक माना जाता है। सरकार की नोटबंदी के बाद की परेशानी, जीएसटी, तीन तलाक बिल, सेना का सर्जिकल स्ट्राइक, बाबा योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली पहली बार बनने वाली संत महात्मा की सरकार, पाकिस्तान की काली करतूतों कुचक्रों , गुजरात चुनाव के बदलते राजनैतिक परिदृश्य, टार्च की रोशनी से आँख का आपरेशन, कंट्रोल शकर की बंदी, मौरंग के भाव, योगीजी की अगुवाई में हुये नगर पंचायतों के चुनाव परिणाम, राहुल गांधी की ताजपोशी,  पेट्रोल पंपों के खिलाफ सर्जिकल आपरेशन, बाबा रहीम और उनके वफादार अनुयाइयों, बाबाओं और मदरसे के इल्मकारों के कारनामों, सड़कों राजमार्गों गाँव खेत खलिहानों में घूम रहे आवारा गोवंश और उनकी राजमार्गों पर हुयी मौतों मुम्बई पब अग्निकांड तथा गैस सिलन्डरों के मूल्यों की मासिक मूल्य वृद्धि को भुलाया नहीं जा रहा है। वैसे भारतीय संस्कृति के अनुसार नये साल की शुरुआत चैत्र माह के प्रथम दिन से होती हैं और उस दिन घर बाहर सब मदमस्त सुहाना मौसम और घर में धनधान्य आने की शुरुआत हो जाती है।आदिशक्ति माँ दुर्गा जी की नवरात्रि के साथ साल की शुरुआत होती है और जगतजननी के नवरात्रों के अंतिम दिन साक्षात ईश्वर स्वरूप मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्मोत्सव मनाया जाता है।पुराने साल का समापन हंसी खुशी आनंद उल्लासपूर्ण रंगों के त्यौहार के साथ होती है और शरीर में नयी ऊर्जा पैदा हो जाती है।बीते दुखभरे दिन भूल जाते हैं और बदलाव का अहसास होने लगता है।अंग्रेजी नववर्ष ऐसे समय आता है जबकि फसल खेत में शिशुवस्था में रहती हैं और भविष्य का कोई सहारा नहीं होता है।जो खेती के सहारे होते हैं वह खाद पानी बीज दवा की खरीद के चलते कंगाल हो जाते हैं।पूस माघ का महीना मौत और दुखों का माना जाता है तथा इस महीने हिन्दू कोई संस्कारिक कार्य नही करते हैं।इन दोनों महीनों में जान बचाने के लाले पड़ जाते हैं और घर बाहर निकलना कठिन हो जाता है। अंग्रेजी नववर्ष की वेला पर अक्सर समापन और आगमन दोनों मौकों पर इतनी ठंडी पड़ती है और बर्फीली हवाएँ चलती हैं कि मुंह से खुशी नहीं बल्कि आह निकलती है।हम सभी खुद अपनी धर्म संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं और नववर्ष का स्वागत और बीते साल को बिदाई शराब पीकर होटलों क्लबों बारों एवं शहरों गाँव चौराहों बाजारों में डीजी पर नाचते हैं और नशे आशिकाने मिजाज के बन जाते हैं। नववर्ष का स्वागत शुद्ध मनचित्त से ईश्वरीय शुभकार्य करके करना चाहिए और नये साल के राजा से उसकी व्यवस्था के अनुरुप चलने का वायदा करके उसका वंदन अभिनंदन करना चाहिए।आज देश के अधिकांश लोग ठिठुरते काँपते बीमार की तरह कराहते हुये एक दूसरे को हैप्पी न्यू ईयर कर रहें हैं जबकि असली नववर्ष नव प्रतिप्रदा नव संवत्सर पर हँसते मुस्कारते पूर्ण स्फूर्ति के साथ नववर्ष की शुभ मंगल कामनाएं देते हैं।हम अंग्रेजों की नकल में अपना असल भूलते जा रहे रहे हैं और अपने भविष्यों को गलत दिशा दिखाने के बराबर है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः--------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
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           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/वरिष्ठ पत्रकार
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
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