Sunday, February 4, 2018

8 फरवरी से रामजन्म भूमि पर सुनवाई सुरु गर्माने लगी राजनीति

आठ फरवरी से सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई शुरू होने के साथ ही संघ परिवार इस मुद्दे पर सियासत गरमाने में जुट गया है। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों का मानना है कि अगले चुनाव में नरेंद्र मोदी सरकार के प्रदर्शन के अलावा तीन तलाक और राम जन्मभूमि मंदिर ही सबसे अहम मुद्दे होंगे।
विश्व हिंदू परिषद से जुड़े सूत्रों के अनुसार उन्होंने सुनवाई शुरू होने से पहले ही सारी तैयारी कर ली है। वे नहीं चाहते की कानूनी प्रक्रिया में उनकी वजह से कोई देरी हो। उनका मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार तीन जजों की बेंच प्रतिदिन 3 घंटे सुनवाई करेगी। उन्हें आशा है कि 30 दिन की कार्यवाही में सभी पक्षों की सुनवाई पूरी हो जाएगी और 16 मई से गर्मी की छुट्टियां शुरू होने से पहले ही बेंच फैसला सुरक्षित कर लेगी।यह मामला सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने है। चूंकि जस्टिस मिश्रा अक्तूबर में रिटायर हो रहे हैं, इसलिए विहिप को उम्मीद है कि वह उससे पहले ही केस का फैसला सुना देंगे। बेंच ने आदेश दिया है कि इस केस की सुनवाई हर हफ्ते मंगलवार बुधवार और बृहस्पतिवार को तीन-तीन घंटे के लिए की जाएगी।विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय का दावा है कि पिछले 35 सालों से चल रही कार्रवाई में हर बार देरी बाबरी मस्जिद के पक्षकारों की वजह से ही हो रही है। ताजा उदाहरण 5 जनवरी का है जब सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से 2019 के लोकसभा चुनाव होने के बाद सुनवाई किए जाने की अपील की। 2011 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन जजों की बेंच द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद यह पहला मौका था जब सुप्रीम कोर्ट सुनवाई शुरू करने जा रही थी। सिब्बल और वरिष्ठ वकील राजीव धवन के हंगामे के बाद बेंच ने सुनवाई 8 फरवरी से शुरू करने का आदेश दिया था।

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