Thursday, February 1, 2018

अजमेर उप चुनाव में बीजेपी हुईं चारो खाने चित्त

अजमेर और अलवर लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में कांग्रेस की जीत ने सचिन पायलट की सीएम कैंडिडेट की उम्मीदवारी को और मजबूत कर दिया है. अजमेर सीट को इससे पहले को बीजेपी का गढ़ माना जाता था क्योंकि बीते आठ लोकसभा चुनावों में से छह बार यहां उसी ने जीत हासिल की है. कद्दावर जात नेता सांवरलाल जाट की मौत के बाद जब इस सीट पर उपचुनाव कि घोषणा हुई तो ये तय माना जा रहा था कि सचिन ही दावेदार होंगे. हालांकि पायलट ने अपनी सीट पर रघु शर्मा को उम्मीदवार बनाकर बीजेपी के किले में सेंध लगा दी. बता दें कि रुझानों में कांग्रेस जीतती दिखाई दे रही है, मतगणना अभी जारी है. कैसे बीजेपी ने रघु शर्मा को चटाई धूल बता दें कि सांवरलाल जाट ने 2014 के लोकसभा चुनावों में सचिन पायलट को शिकस्त दी थी. पायलट ने जब रघु शर्मा को उम्मीदवार चुना तब कहा जा रहा था कि ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि अगर एक बार फिर पायलट अपनी सीट बचाने में नाकाम रहे तो अशोक गहलोत का सीएम कैंडिडेट बनना तय हो जाएगा. दूसरी तरफ अगर वो इस पर जीत भी जाते तो 2019 के लोकसभा चुनावों में एक साल बाद ही उन्हें फिर से इसी अग्निपरीक्षा से गुजरना होता. दोनों ही स्थितियों में उनकी सीएम कैंडिडेट की उम्मीदवारी खतरे में रहती. हालांकि पायलट ने रघु शर्मा को सिर्फ अपनी सीएम कैंडिडेट कि उम्मीदवारी बचाने के लिए आगे किया है ये पूरी तरह सही नहीं है. असल में पायलट ने भी कांग्रेस के पुराने स्टाइल की तरह ही जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखकर उम्मीदवार चुने हैं. बता दें कि अजमेर जाट और गुर्जर बहुल क्षेत्र है हालांकि इस इलाके में मुस्लिम, राजपूत, ब्राह्मण, वैश्य और रावत समुदाय से जुड़े लोग भी बड़ी तादाद में  और वैश्य बीजेपी के परंपरागत वोटर्स माने जातशर्मा के जरिए इसी वोट बैंक में सेंध लगा दी. उधर कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल के एनकाउंटर से नाराज़ राजपूतों को भी पायलट ने अपनी तरफ मिलाने के लिए कई मुलाकातें की राजे के दो मंत्रियों की भी है ये हार अजमेर से आने वाले विधायक वासुदेव देवनानी और अनीता भदेल वसुंधरा कैबिनेट में मंत्री भी हैं. इसे सिर्फ वसुंधरा ही नहीं बल्कि उनके दोनों मंत्रियों की हार के तौर पर भी देखा जा रहा है।

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