Sunday, February 4, 2018

राजस्थान में प्रभारियों से पूंछा कैसे हारी पार्टी

जयपुर। उपचुनाव में हार से सकते में आई भाजपा का मंथन जारी है। आज प्रदेश कार्यालय में चल रही बैठक में उन सभी 17 विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी मंत्रियों और पार्टी की तरफ से लगाए गए प्रभारियों से पूछा जा रहा है कि चुनाव में इतनी करारी हार कैसे हुई? चुनाव प्रभारियों ने मतदान के बाद पार्टी कार्यालय को भेजी गई रिपोर्ट में बढ़त की बात बताई थी, लेकिन मामला उसके उलट निकला। बैठक में प्रभारियों से ऐसे कार्यकर्ताओं और नेताओं की सूची भी मांगी जा रही जो चुनाव में घर बैठे थे।. विधायकों पर निर्भरता भारी
अब तक मंथन में निकल कर आया कि विधायकों पर निर्भरता भारी पड़ी। पार्टी नेतृत्व की तरफ से यह भी मैसेज देना भी भारी पड़ा कि जिस विधायक के क्षेत्र से लीड कम होगी, उसके टिकट पर संकट होगा। इसके चलते नाराज कार्यकर्ताओं और विरोधी गुट ने चुनाव प्रचार से दूरी बना ली।
वी सतीश देंगे रिपोर्ट
चुनाव में परिणाम आने के तुरंत बाद राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री वी सतीश ने प्रदेश में डेरा डाल लिया है। बताया जा रहा है कि सतीश पूरे चुनाव को लेकर केन्द्रीय नेतृत्व को रिपोर्ट सौंपेंगे। इसमें प्रभारियों की तरफ से बताए गए कारणों को भी गिनवाया जाएगा।
संगठन में बदलाव की चर्चा
चुनाव में हार के बाद बड़ा सवाल भाजपा के हल्कों में तैर रहा है कि क्या प्रदेश में किसी तरह का बदलाव किया जाएगा। इसे लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं आपस में चर्चा करते हुए दिखाई दे रहे हैं। सूत्र बता रहे हैं कि संगठन में विधानसभा सत्र के दौरान और सरकार में सत्र के बाद बदलाव किया जा सकता है।
परम्परागत वोट छिटके
बैठक में सामने आया कि भाजपा का हमेशा से जो परम्परागत वोट रहा, उसे पार्टी में उपेक्षित महसूस करवाया जा रहा है। राजपूत, ब्राह्मण, वैश्य वर्ग पार्टी से दूर हो गया है। जीएसटी का असर भी दिखाई दिया। नोटबंदी ने भी आग में घी का काम किया। पिछले चुनावों में जो दलित वोट भाजपा से जुड़ा था, वह भी पार्टी से खिसक गया। डांगावास प्रकरण को इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है। युवाओं में भी सरकार के प्रति नाराजगी दिखाई दी है। सरकारी नौकरी नहीं मिलने से युवा खासे नाराज हैं। युवाओं की नाराजगी को दूर करने के लिए सरकार को जल्द से जल्द भर्ती करने की सलाह कोर कमेटी ने दी है।

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