Friday, March 23, 2018

चुनावी साल में आई फेसबुक पे डेटा चोरी की याद

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक सहित सोशल मीडिया पर भारतीय लोगों के संपर्क सूत्रों का डाटा चोरी कर उसके व्यावसायिक इस्तेमाल का आरोप लगाया है। साथ में यह भी कहा है कि वक्त पड़ने पर भारत सरकार मार्क जकरबर्ग को भी तलब करेगी ।
कितनी अजीब बात है न यह कि पिछला चुनाव सोशल मीडिया के दम पर जीतने वाली भाजपा को 4 साल तक जब तक , भाजपा के विरोधियों को फेसबुक और सोशल मीडिया की मदद से निपटाया जा रहा था और सोशल मीडिया का पलड़ा भाजपा के पक्ष में था , तब तक ऐसी किसी डाटा चोरी की याद केंद्र सरकार को नहीं आई ।परंतु पिछले कुछ दिनों से जब से सरकार के क्रियाकलाप को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर छींटाकशी शुरू हो चुकी है , और जिसके परिणाम स्वरुप युवा वर्ग में काफी हद तक मौजूदा सरकार पर प्रश्न चिन्ह लग चुका है। उसके बाद आखरी चुनावी साल में इस तरह का प्रयास और आरोप सोशल मीडिया पर लगाकर डाटा चोरी की बात करना हजम होने वाली बात नहीं दिख रही है। क्योंकि जब *सोशल मीडिया को हथियार के रूप में इस्तेमाल करके भाजपा ने कई गढ़ जीत लिए और अपना एक छत्र राज कायम कर लिया। तब तक भाजपा को इस आम आदमी की निजता के अधिकार की याद क्यों नहीं आई ?* और अब इस चुनावी साल में आकर *जब सोशल मीडिया एक बहुत बड़े हथियार के रूप में उन्हीं के खिलाफ इस्तेमाल किए जाने का खतरा पैदा हो चुका है। तब इस तरह का आरोप सोशल मीडिया पर लगाना और डाटा चोरी की बातें करके सोशल मीडिया की साख खराब करने का प्रयास केंद्र सरकार की बौखलाहट नहीं तो और क्या है ?* निसंदेह सोशल मीडिया आज के युग  की सूचना प्रणाली का एक सशक्त माध्यम बन कर उभरा है जिससे सामंजस्य बिठाना राजनीतिक दलों की लगभग मजबूरी बन चुका है। देश की जनसंख्या का एक बहुत बड़ा हिस्सा जिसमें 70% युवा वर्ग जुड़ा हुआ है वह सोशल मीडिया पर ही सूचनाएं देखकर अपनी राय बना रहा है। ऐसे माहौल में सोशल मीडिया के उपयोग को इस तरह कटघरे में खड़ा कर देने वाली सरकार कहीं ना कहीं अपने आप को लोकतंत्र के मूल्यों पर खरा न पाकर बजाय खुद के सुधार करने के , सोशल मीडिया पर इस तरह का आक्रमण करती हुई सुशोभित नहीं दिखाई दे रही है।सोचने वाली बात यह है कि पिछले चुनाव में सोशल मीडिया के हथियार का व्यापक इस्तेमाल करके ताकत में आई सरकार आज खुद अपने ही हथियार का शिकार होने के डर से सोशल मीडिया पर ही इस तरह के आरोप लगा रही है । सरकार के इस रवैया का जो संदेश युवाओं में जा रहा है उस संदेश की मार से आने वाले चुनाव में इस सरकार का बच पाना मुश्किल नजर आ रहा है। फिर *क्या पिछले चुनावों में सोशल मीडिया और डेटा के इस तरह से इस्तेमाल करने से इनकार कर सकती है भाजपा ?*
भैया !!!  हम करें तो प्यार और कोई और करे तो बलात्कारकी तर्ज पर इस तरह की उल्टी सीधी बातें करने वाले नेताओं का मस्तिष्क यह क्यों नहीं सोचता कि उनके इस कृत्य का आम लोगों में क्या संदेश जाएगा ? फिर बिना सोचे समझे केवल अपना बचाव करने हेतु इस तरह का माहौल बनाने वाली सरकार आखिर यह क्यूँ नहीं सोच पाती की *सोशल मीडिया केवल राजनैतिक दलों द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाला हथियार नहीं है बल्कि यह आज के आम जन जीवन का  हिस्सा भी है। जहां आम आदमी अपनी खुशियां ,अपने गम अपनी सफलताएं और उपलब्धियां अपने लोगों तक पहुंचा कर खुशी जाहिर करता है। यदि हम यह कहें कि सोशल मीडिया आम आदमी की खुशी का हिस्सा है तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है। लेकिन इन राजनैतिक लोगों को सिवाय अपनी कुर्सी के कुछ दिखाई कहां देता है ?* यही तो इस देश की विडंबना है

नरेश राघानी
प्रधान संपादक
हरदोई

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