Thursday, March 15, 2018

लोकसभा उपचुनाव परिणाम भूल सुधार का अवसर है-भोला नाथ

              सुप्रभात- सम्पादकीय
राजनीति में कभी चुनावी जीत पर अभिमान नही करना चाहिए क्योंकि लोकतंत्र में जीत हार का फैसला जनता जनार्दन या मतदाता भगवान करता है। मतदाता की खुशी कब नाराजगी में बदल जायेगी कोई बता नहीं सकता है इसीलिए जनादेश पर घमंड करना उचित नहीं होता है। इतिहास साक्षी है कि देश प्रदेश में आजादी के बाद से अबतक कई चुनावों में अलग अलग दलों की प्रचंड बहुमत से जीत हुयी लेकिन अगले ही चुनाव में प्रचंड हार हो चुकी है। भाजपा का 2014 से शुरू हुआ विजय अभियान लोकसभा के आगामी चुनाव के पहले उत्तर प्रदेश बिहार आते आत लगता हैे धीमा और कमजोर सा हो गया है। कल उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उप चुनाव परिणामों ने एक बार सभी को भौंचक्का कर अचरज में डाल दिया है।गोरखपुर सीट मुख्यमंत्री योगीजी की तो फूलपुर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की गृह सीट मानी जाती है।किसी को इन दोनों सीटो पर भाजपा की इतनी बुरी हार होने का अनुमान तक नहीं था और सभी जानते थे कि मोदी योगी की चल रही आँधी में दोनों सीटें भाजपा को मिल जायेगी। यहीं अनुमान बिहार में एक संसदीय सीट पर हुये चुनाव के बारे में लगाया जा रहा था। आखिरकार बिहार की इस सीट को भी इस उपचुनाव में भाजपा बुरी तरह हार गयी है और वहाँ पर भी लालू प्रसाद यादव की पार्टी का प्रत्याशी जीत गया है। बिहार में ही दो विधानसभा क्षेत्रों का भी चुनाव हुआ है लेकिन एक सीट ही भाजपा जीत पाई है दूसरी पर लालू प्रसाद यादव की पार्टी का उम्मीदवार जीत गया है। गोरखपुर फूलपुर तथा बिहार में हुये लोकसभा व विधानसभा चुनाव के परिणाम अपने आप में अभूतपूर्व प्रेरणादायक हैं और इन परिणामों के लिए राज्य सरकार के साथ केन्द्र सरकार भी जिम्मेदार है। यह चुनाव परिणाम केन्द्र और राज्य केन्द्र सरकार दोनों को आगामी लोकसभा चुनाव के पहले एक आइना दिखाने जैसे हैं। सभी जानते हैं कि देश की राजनीति में उत्तर प्रदेश और बिहार की मुख्य भूमिका रहती है क्योंकि सबसे ज्यादा सदस्य इन दोनों राज्यों से चुनकर लोकसभा पहुंचते हैं। गोरखपुर फूलपुर के चुनाव परिणाम बसपा सपा गठबंधन का प्रतिफल कम बल्कि जनाक्रोश का फल अधिक है।भाजपा के लिए अभी एक साल का समय है कि खुद अपने गिरहबान को झाँककर अपनी कमजोरी का पता लगाकर उसे ठीक कर ले क्योंकि यह हिन्दुस्तान के मतदाता भगवान हैं जो पलक झपकते ही राजा को रंक और रंक को राजा बना देते हैं।उपचुनाव के परिणाम एक हिसाब से आगामी चुनाव की टेस्टिंग रिपोर्ट जैसे है इसलिए अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण हैं।इन परिणामों से विपक्षी खासतौर पर सपा बसपा के मुरझाए चेहरों पर रौंनक वापस आ गयी है और उनका मनोबल चौगुना बढ़ गया है।इन परिणामों से सबसे बड़ा झटका भाजपा को लगा है और उसे करेंट जैसा लगा है। दोनों सीटों पर इतनी बुरी हार का अनुमान किसी को भी नहीं था और लोग गोरखपुर की सीट को तो पक्की मान ही रहे थे। विपक्षियों को भी दोनों सीटों पर विजय मिलने की उम्मीद नहीं थी लेकिन मोदी योगी की कार्यशैली और बसपा सपा गठबंधन का कमाल है कि भाजपा औधे मुँह गिर गयी। भाजपा इन चुनाव परिणामों को लेकर मंथन करने में जुट गयी है और परिणाम घोषित होने के पहले ही प्रदेश अध्यक्ष को तलब कर लिया गया।गोरखपुर के जिलाधिकारी की कार्यशैली की शिकायत विपक्षी कर चुके हैं और मतगणना स्थल से मीडिया कर्मियों को हटाना चर्चा का विषय बना हुआ है।भाजपा को अपने पुराने जनादेश को यथावत रखने के लिए जन आँकाक्षाओं जन अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करने होगे। भाजपा शासनकाल में जनता से जुड़ी तमाम योजनाएं प्रभावित हुयी हैं और जनता की दौड़भाग व परेशानी बढ़ी है।
           भोलानाथ मिश्र
  वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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