Wednesday, March 14, 2018

नरेश अग्रवाल के भाजपा मिलन पर भोला नाथ मिश्रा की विशेष रिपोर्ट

कहते हैं कि राजनीति में सबकुछ जायज होता है और इसमें कोई किसी का न तो दोस्त होता है और न ही दुश्मन होता है। वह जमाना लद गये जबकि राजनीति वसूलों सिद्धांतों व विचारधारा की होती थी और लोग वसूलों सिद्धांतों विचारों से प्रभावित होकर राजनीति में आते थे। बदलते समय में लोग वसूल सिद्धांत लेकर राजनैतिक दल में नहीं आते हैं बल्कि जहाँ उल्लू सीधा होता है उस पार्टी में बेहिचक शामिल होकर उसका और उसके नेताओं का गुणगान करने लगते हैं। हमारे यहाँ पर कुछ दल और नेता ऐसे हैं जिन्हें वसूल सिद्धांत विचार से कोई वास्ता सरोकार नहीं रहता है और जो पार्टी सत्ता में आती है वह उसके साथ चले जाते हैं।पार्टी और विचार बदलने का दौर जब जब चुनाव आता है तो जोर पकड़ लेता है। टिकट के लिये मारामारी व पाला बदलने का क्रम शुरू हो जाता है और टिकट न मिलने पर नेता तत्काल जिस पार्टी में रहता है उस पार्टी और उसके नेताओं पर चरह तरह के आरोप लगाकर पार्टी छोड़ देते हैं।
भाजपा को भले ही कुछ पार्टियां साम्प्रदायिक दल मानते हैं इसके बावजूद हर पार्टी के लोग सत्ता की लालच में सारे वसूलों को बलायें ताख रखकर शामिल हो रहे हैं और पार्टी के नेता आँख मूँदकर तहरदिल से उनका स्वागत कर रहे हैं।जो कल तक भाजपा और राम मंदिर के विरोध में आग उगल रहे थे आज टिकट के लिये उसकी ही जुबान बोलने लगे हैं।परसों समाजवादी पार्टी के पुरोधा राज्य सभा सदस्य और निजी स्वार्थ के लिए पार्टी बदलने में माहिर बेतुके विवादित बयान और अभद्र अशोभनीय टिप्पणियों के लिये चर्चा में रहने वाले नरेश अग्रवाल एक बार फिर टिकट न मिलने पर सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो गये हैं। अग्रवाल अपने राजनैतिक जीवन के अड़तीस सालों में चार बार पार्टी बदलकर सत्ता का सुख भोग चुके हैं और वर्तमान समय में उनके साथ उनका पुत्र भी विधायक है।शराब व्यवसाय से 1980 में  राजनीति में प्रवेश करके कांग्रेस के टिकट पर हरदोई से सासंद बनने वाले अग्रवाल अब तक सात बार विधायक बन चुके हैं।1997 में उन्होंने कांग्रेस के कुछ विधायकों के साथ बगावत करके राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का गठन करके कल्याण सिंह सरकार का समर्थन किया था।इसके बदले वह कल्याण के साथ साथ राम प्रकाश गुप्त व राजनाथ सिंह मंत्रिमंडल में उर्जा मंत्री रहे लेकिन 2002 में वह सपा में शामिल होकर मुलायम सिंह यादव के साथ उनके मंत्रिमंडल में परिवहन मंत्री के रूप में रहे। 2007 का चुनाव तो उन्होंने सपा से लड़कर जीता लेकिन सत्ता में न आने पर वह 2008 में सपा को ठेंगा दिखाकर बहुजन समाज पार्टी में शामिल होकर बहन जी की शरण में चले गये थे।2012 में अग्रवाल साहब को जब लगा कि बीएसपी डाउन और सपा बढ़ रही है तो तत्काल बसपा छोड़कर पुनः अपने बेटे के साथ सपा की गोद में आ गये थे और बदले में सपा ने अपनी पार्टी से उन्हें राज्यसभा सदस्य बना दिया था। इस बार सपा ने उनका टिकट काटकर सिने अभिनेत्री जया बच्चन को राज्यसभा टिकट दे दिया है। यह वहीं अग्रवाल साहब हैं जिन्होंने ने राज्यसभा में हिन्दू देवी देवताओं के नाम से शराब के ब्रांड गिनाये थे और कुलभूषण जाधव के लिये आतंकी शब्द का इस्तेमाल किया था।इतना ही नहीं अग्रवाल साहब भाजपा में पैर रखते ही अपनी औकात में आ गये और जया बच्चन को नाचने गाने वाली कहकर विवाद खड़ा कर दिया गया है।अग्रवाल साहब के भरे मंच से दिये गये इस विवादित  बयान के बाद भाजपा में खलबली मच गई और तत्काल विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जया बच्चन पर की गई टिप्पणी को अनुचित और अस्वीकार्य बताया। आश्चर्य तो इस बात का है कि अग्रवाल जी ने भाजपा में शामिल होने और जया बच्चन को नाचने गाने वाली कहने साथ साथ अपना भविष्य सुरक्षित रखने के लिए नेताजी और धुर विरोधी प्रोफेसर रामगोपाल की तारीफ में कसीदे भी पढ़ना नही भूलें।अग्रवाल के साथ उनके विधायक बेटे ने भी सपा छोड़ दिया है और भाजपा के पक्ष में मत देने की घोषणा करके सपा में खलबली मचा दी है। अग्रवाल जी के अचानक भाजपा में शामिल होने से भाजपाई हतप्रभ और असहज से हो गये हैं और उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर कौन से फायदे के लिए उन्हें पार्टी में झटपट शामिल कर लिया गया है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं ।। ऊँ भूर्भुवः स्वः -------/ ऊँ नमः शिवाय।।।

           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/ समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी

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