Wednesday, March 28, 2018

जनकल्याणकारी एम्बुलेंस सेवाएं और लापरवाह कर्मचारी

सरकार आम नागरिकों को बेमौत असमय मरने से बचाने के लिए जहाँ चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध करा रही है वहीं पर तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एम्बुलेंस सेवाएं भी निःशुल्क उपलब्ध करा रही है। समाजवादी पार्टी के जमाने में शुरू हुयी एम्बुलेंस की एक सौ दो और एक सौ आठ नम्बर की आम नागरिकों के वरदान साबित हुयी है। इन एम्बूलेंस सेवाओं से निश्चित तौर पर दुर्घटनाओं घटनाओं में तत्काल चिकित्सा के अभाव में मरने की संख्या में कमी आयी है। सरकार की कोई भी जन कल्याणकारी योजना हो लेकिन अगर उसे संचालित करने वाले लापरवाही बेपरवाह भ्रष्ट हो जायेगें तो वह लक्ष्य विहीन होकर अकल्याणकारी हो जाती है। सरकार की शायद यह पहली कल्याणकारी एम्बुलेंस योजना होगी जो इतने कम समय में इतना अधिक जनप्रिय और लोकप्रिय हो गयी है।चाहे डिलवरी हो चाहे अजारी बीमारी अथवा दुर्घटना हो फोन लगाते ही एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध हो जाती है।अखिलेश सरकार के सत्ताच्युत होने के बाद एक बार एम्बुलेंस सेवाएं डगमगा गयी और कभी दिनों तक डीजल के अभाव में सेवाएं बाधित रही लेकिन डीजल की व्यवस्था सुधर गयी थी। एम्बुलेंस सेवाएँ कभी कभी जानलेवा हो जाती हैं और समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध न हो पाने के कारण जान चली जाती है। एम्बुलेंस के लिये फोन करने के बाद पूंछतांछ करने और आनलाइन रहने में तमाम समय बीत जाता है और एम्बुलेंस खड़ी होने के बावजूद निर्देश के अभाव में उपलब्ध नहीं हो पाती है।कभी कभी घंटों एम्बुलेंस आने के इंतजार करने में लग जाते हैं उतनी देर में जान खतरे में पड़ जाती है।गाँव देहात का साधारण व्यक्ति सवाल जबाब नहीं दे पाता है और कभी कभी सवाल जबाब में मरीज या घायल की जान चली जाती है।एम्बुलेंस पर मरीज की जगह सवारी ढोने के भी मामले सामने आ चुके हैं। एम्बुलेंस पर प्राणरक्षक आक्सीजन आदि सरकार इसीलिए उपलब्ध कराती है ताकि गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सके इसके बावजूद कभी कभी एम्बुलेंस कर्मियों की लापरवाही भी मरीज की जान पर बन आती है।अभी तीन दिन पहले एम्बुलेंस की सेवाएं उस समय कंलकित हो गयी जबकि एक मरीज की मौत एम्बुलेंस में आक्सीजन के अभाव में हो गयी जबकि हर एम्बुलेंस में आक्सीजन सेवा अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहती है। एम्बुलेंस कर्मियों की लापरवाही मनमानी के फलस्वरूप सरकार की लाख व्यवस्था के बावजूद मरीज की जान चली गई।सरकार ने इस मामले में जाँच के निर्देश दिये हैं लेकिन जिस घर परिवार को बरबाद एवं असहाय होना था वह तो बरबाद असहाय हो ही गया। सभी जानता हैं कि जाँच में जल्दी कोई दोषी नहीं मिलता है और मात्र औपचारिकता पूरी की जाती है।धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ
          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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