Thursday, March 15, 2018

उप चुनाव में भाजपा हुई चित्त लेकिन पिक्चर अभी बाकी है

यूपी में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी के गठजोड़ से लोकसभा के दो उपचुनावों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। 14 मार्च को आए नतीजों में भाजपा के उम्मीदवार गोरखपुर और फूलपुर सीटों पर हार रहे हैं। गोरखपुर सीएम योगी आदित्यनाथ और फूलपुर डिप्टी सीएम कैशव प्रसाद मौर्य के निर्वाचन क्षेत्र हैं। चूंकि इस समय सपा की कमान अखिलेश यादव के हाथ में है इसलिए उपचुनाव में हर कीमत पर मायावती से गठबंधन कर लिया गया। हालांकि मायावती ने उपचुनाव के गठबंधन को अस्थाई और राजनीतिक सौदेबाजी बताया। लेकिन फिर भी अखिलेश यादव ने कोई प्रतिकूल प्रतिक्रिया नहीं दी। अखिलेश की वजह से ही बसपा के वोट सपा उम्मीदवारों को मिल गए और भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। यूपी में अब यह साफ हो गया है कि यदि 2019 का लोकसभा का चुनाव सपा और बसपा मिलकर लड़ते हैं तो भाजपा की जीत संभव नहीं होगी। वर्ष 2014 और 2016 में सपा और बसपा ने अलग-अलग चुनाव लड़ा तो भाजपा को लोकसभा और विधानसभा में ऐतिहासिक जीत हासिल हुई। लेकिन 14 मार्च के चुनाव नतीजे बता रहे हैं कि भाजपा के पास सपा और बसपा के गठजोड़ का कोई तोड़ नहीं है। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व 2019 में फिर से सरकार बनाने का जो दावा कर रहा है उसके पीछे यूपी से भाजपा के 72 सांसद हैं। भाजपा को उम्मीद थी कि विधानसभा के चुनावों में जीत के बाद लोकसभा की जीत को बरकरा रखा जाएगा, लेकिन उपचुनावों के नतीजों ने भाजपा को अपनी सोच बदलने के लिए मजबूर कर दिया है। एक तरह से यह सीएम योगी आदित्यनाथ के एक वर्ष के कार्यकाल की परीक्षा भी थी। इसमें कोई दो राय नहीं कि अपराध पर नियंत्रण पाने के लिए योगी के राज में सख्त कदम उठाए गए। लेकिन अब ऐसे सख्त कदमों पर भी असर पड़ेगा। देखना होगा कि अब भाजपा सपा-बसपा के गठजोड़ का मुकाबला कैसे करती है।
अररिया में भी हारः
बिहार के अररिया के लोकसभा के उपचुनाव में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ रहा है। यहां आरजेडी के उम्मीदवार सराफराज आलम लगातार बढ़त बनाए हुए हैं। मुस्लिम बहुल्य इस संसदीय क्षे़त्र में आरजेडी की जीत का राजनीतिक महत्व है। भाजपा को उम्मीद थी कि आरजेडी और जेडीयू में विवाद होने के बाद अररिया की जीत आसान होगी। लेकिन जेडीयू का साथ होने के बाद भी अररिया में भाजपा उम्मीदवार की जीत नहीं हो सकी है।

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