Thursday, March 29, 2018

देश के साथ कब होगा थर्ड जेंडर किन्नरों उत्थान-रामशरण शर्मा

साथियों मैं आपको अवगत कराना चाहूंगा की किन्नर जिससे हम समाज में थर्ड जेंडर के रूप में देखते हैं सरकार ने आम आदमी की तरह उन्हें भी संरक्षण और अधिकार ट्रांसजेंडर परसन राइट्स ऑफ प्रोटेक्शन एक्ट 2016 के बिल में अधिकार दे रखे हैं जो उपरोक्त मेंशन किया गया है समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उन्हें वोटिंग राइट्स से लेकर समाज में हर तरह का अधिकार प्राप्त हो गया है समाज से परे हटकर जिन विषमताओं का दंश यह कम्युनिटी झेल रही है उनमें  प्रमुख रुप से इनका अशिक्षित होना रोजगार ना होना इस तरह का बालक पैदा होने से समाज या परिवार से बहिष्कृत होना और किन्नर बिरादरी के लोगों के बीच रहकर उन्हें अपने लिए रोजी रोटी कपड़ा आदि के आम इंसान के लिए की तरह साधन खोजने पड़ते हैं
मित्रों आप ही बताओ ऐसी स्थिति में जब किसी व्यक्ति के पास रोजगारपरक साधन शिक्षा उपरोक्त का अभाव होगा तो भूख और अन्य सुविधाओं को जुटाने के लिए तो क्या करेगा ऐसी स्थिति में किन्नरों के प्रति लोगों की एक अलग विचारधारा बन गई है और वह भी अपने के बीच गुरु प्रथा और उनमें जो शिक्षित किन्नर और संवर्ग है उनकी भी शोषण का शिकार हो रहे हैं ऐसी स्थिति में हमारे समाज का कर्तव्य और यह आवश्यक हो जाता है कि हमें उन्हें अन्य नजरिए से न देख कर एक इंसानियत के नजरिए से देखें रोजगार की स्थिति और खाने पीने के लिए रोजी रोटी का ना होना हर व्यक्ति से कुछ न कुछ करवा देता है और वह भी अपना भीख जैसा मांगकर या बधाइयां गाकर किसी भी तरह अपने जीविकोपार्जन करते हैं उपरोक्त की स्थिति में अगर इनके साधन बन जाएंगे तो यह भी रोजगारपरक साधन जुटाकर सरकार के प्रयासों  की वजह से एक सम्मानित जीवन यापन कर सकेंगेसाथियों मैं आपको बताना बताना  चाहूंगा कि किन्नर जिसे हम समाज में थर्ड जेंडर  में देखें हैं सरकार ने आम आदमी की तरह उन्हें भी संरक्षण और अधिकार दे रखे हैं और उन्हें  अधिकृत  तौर पर  उपरोक्त बिल में  एक्ट की वजह से  अधि कृत किया गया है समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उन्हें वोटिंग राइट्स से लेकर समाज में हर तरह का अधिकार प्राप्त हो गया है समाज से बहिष्कृत है बिरादरी उनमें प्रमुख रूप से इनको समाज द्वारा तिरस्कार रूप में देखने की प्रवृत्ति लोगों के जेहन में घर कर गई है यह समाज किन्नर बिरादरी के लोगों के बीच रहकर ही अपनी रोजी रोटी कपड़ा आदि  अन्य इंसान  की तरह ही साधन खोजने को मजबूर है ऐसी स्थिति में जहां तक इन्हें रोजगार के रूप में नाच गाना बधाइयां और अन्य गणित साधनों से जो पैसा मिलता है उससे गुजारा करते हैं मित्रों आप ही बताओ ऐसी स्थिति में जब किसी व्यक्ति के पास रोजगार लेने  के लिए साक्षरता कानून की बंदिशें सुविधाओं का अभाव होगा और 2016 से पहले इनके अधिकार का कोई कानून बना होता तो यह जीविका के लिए बधाई नाच गाना आदि के जरिए मोटी रकम को जबरदस्ती वसूली भी कर रहे थे क्योंकि यह मजबूर थे और है भी जो कि समाज का हर व्यक्ति इनकी डिमांड को पूरा करने में या तो कन्नी काटते हैं और असमर्थ भी हैं
ऐसी स्थिति में  वो क्या करे किन न्नरों के प्रति लोगों की एक अलग विचारधारा बन गई और वो भी अपने किन्नर बिरादरी के बीच पनप रहे गुरु प्रथा और उनमें जो शिक्षित किन्नर है उनकी भी शोषण का शिकार हो रहे हैं
अतः समाज के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य हो जाता है कि हम इन किन्नरों के लिए अधिकृत कानून के तहत इन्हें उन का बोध कराएं और समझाएं तभी यह अज्ञानता के अंधकार से निकलकर शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार की तरफ ध्यान देंगे और इस सुविधाजनक स्थिति के लागू हो जाने पर और खाने पीने रोजी रोटी के बेहतर साधन मुहैया होने पर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो जाएंगे
लेखक
रामशरण शर्मा पूर्व आर्मी मैन

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