Saturday, March 31, 2018

यूपी की तबादला नीति बदली नई नीति पर लगी मुहर

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की तय हुई तबादला नीति बदलने जा रही हैं। साल २०१७-२०१८ की इस तबादला नीति को लेकर सीएम योगी ने गहन मंथन कर रही है। मुख्य सचिव राजीव कुमार ने गुरुवार को स्थानांतरण नीति जारी कर दी है। खास बात यह है कि यह नीति पहली बार चार वर्ष के लिए लागू की गयी है। इसके तहत आगामी एक अप्रैल से विभागों में तबादले किए जा सकेंगे। तबादला नीति 31 मई तक लागू रहेगी। मुख्य सचिव ने अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, विभागाध्यक्षों, कार्यालयाध्यक्षों, मंडलायुक्तों व जिलाधिकारियों को नई नीति के मुताबिक स्थानांतरण संबंधी कार्रवाई के आदेश दे दिए हैं।उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक योगी सरकार जिलों में तैनात अफसरों के लिए छह साल की सीमा घटाकर पांच साल और मंडल में तैनात अफसरों के लिए दस साल की सीमा घटाकर सात साल सीमा तय करने पर विचार कर रही है।
20 प्रतिशत कर्मियों को होगा तबादलास्थानांतरित अधिकारियों व कर्मचारियों की संख्या विभाग के समस्त अधिकारियों व कर्मचारियों की संख्या के 20 प्रतिशत तक सीमित रखी जाएगी। इससे अधिक की जरूरत पर समूह क व ख के लिए मुख्यमंत्री और समूह ग व घ के लिए विभागीय मंत्री की अनुमति जरूरी है।
दिव्यांगों को तबादला नीति में खासी रियायतें
जिले में तीन वर्ष और मंडल में सात वर्ष से टिके अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला होगा। प्रदेश सरकार ने दिव्यांगों को तबादला नीति में खासी रियायतें दी हैं। वह जहां चाहेंगे, उनका तबादला करने में तरजीह दी जाएगी। वहीं समूह 'क' और 'ख' के जिन कर्मचारियों के रिटायरमेंट की अवधि दो वर्ष शेष हैं उन्हें उनके गृह जनपद के आसपास और समूह 'ग' और 'घ' के कर्मचारियों को उनके गृह जनपद में तैनात करने की छूट होगी।एस्पिरेशन डिस्ट्रिक्ट में दो साल की तैनाती
योगी कैबिनेट ने सूबे के आठ एस्पिरेशन डिस्ट्रिक्ट में अधिकारियों व कर्मचारियों की तैनाती दो साल के लिए करने का फैसला भी लिया है। इनमें चित्रकूट, बलरामपुर, बहराइच, सोनभद्र, श्रावस्ती, चंदौली, सिद्धार्थनगर और फतेहपुर शामिल हैं।

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