Monday, March 26, 2018

रामनवमी और राम रावण पर विशेष भोला नाथ मिश्रा का लेख

  सभी जानते हैं कि आज ही के दिन त्रेतायुग में ईश्वर भगवान विष्णु ने चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ के राजमहल में राम के रुप में धर्म धरती साधु संत महात्माओं आदि के लिये मनुष्य रुप में अवतरित हुए थे।आज दुनिया भर में उनका प्राकट्य जन्मोत्सव पूरी श्रद्धा आस्था के साथ मनाया जा रहा है।इस पावन मौके पर अयोध्या जी में विशेष महोत्सव बनाया जाता है और लगता है कि आज ही भगवान पैदा हुये हैं।भगवान राम ने समाजिक नही बल्कि जीविक समरसता लाने के लिए बंदर भालू रीछ पशु पक्षियों एवं वनस्पतियों को एक साथ खड़ा कर दिया और जमाने को बता दिया कि प्रजा के सामने राजा का अपना जीवन कुछ नही होता है।भगवान राम का अवतरण महाशक्ति परम शक्ति की नवरात्रि के अंतिम दिन होता है क्योंकि रावण का वध बिना महाशक्ति के संभव नहीं था।यही कारण है कि भगवान राम का अवतरण माँ सिद्धिदात्री के दिन हुआ है और नवदुर्गा के आठ स्वरुपों की आठ दिनों की विशेष पूजा ब्रत अनुष्ठान के बाद फल प्रदान करने नवें दिन वह  सिद्धदात्री स्वरूप धारण करती हैं। रावण पहली बात कोई ऐरा- गैरा-नत्थू-खैरा साधारण नहीं था बल्कि वह भगवान विष्णु का प्रिय विश्वासपात्र द्वारपाल रक्षक था और भगवान की आज्ञा का अनुपालन करने में उसे तीन जन्मों तक असुर होने का श्राप मिल गया था।रावण के रुप में श्रापित द्वारपालों जय और विजय का असुर के रूप में रावण का यह तीसरा जन्म था और वरदान के अनुरूप तीसरे जन्म में उसका वध करके दोनों का उद्धार करने विष्णु भगवान को अवतरित होना था। रावण संत महात्माओं से धन की जगह उनका खून टैक्स के रुप में वसूलने और अपने को स्वयंभू भगवान मानकर भगवान विष्णु का द्रोही बन गया था।उसने भगवान राम की धर्मपत्नी सीता माता का अपहरण उनके साथ विवाह रचाने के लिये कम अपनी मौत बुलाने के लिए ज्यादा किया गया था। रावण उसी समय समझ गया था जब उसे बताया गया था कि उसकी बहन सूपनखा की नाक कटने के बाद उसके दो उसके समान बलशाली खर दूषण की मौत की सूचना उसे मिली थी। इसीलिए उसने उसी समय कहा था कि अगर वह दोनों साधारण मनुष्य होगें तो उनकी पत्नी का हरण करके बहन के अपमान बदला ले लेगें और अगर साक्षात भगवान विष्णु होगें तो उनसे बैर करके अपना उद्धार कर लूंगा। त्रेतायुग में एक रावण था जो सीताजी का हरण कर ले गया था लेकिन वह रावण को चरित्र था कि उसने उन्हें सोचने के लिए एक माह तक का समय देकर महिला सुरक्षाकर्मियों के साथ राजमहल से दूर अशोक वाटिका में रखा गया था।आजकल रावण की जगह महारावण पैदा हो गए हैं और परनारी या अविवाहताओं का हरण ही नहीं बल्कि उनकी आबरू के तत्काल दुश्मन बन जाते हैं।आजकल हमारे आपके बीच रावण और सूर्पनखा की कमी नही है और गली घूमते मिल सकते हैं।ऐसे रावणों के वध के लिये राम बनना होगा तभी इन आसुरी प्रवृत्तियों से छुटकारा मिल सकता है।आज हम भगवान राम के प्राकट्य जन्मोत्सव एवं नवरात्रि समापन की पावन वेला अपने सभी अग्रजों शुभचिंतकों सुधीपाठकों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं और ईश्वर से मर्यादित जीवन जीने की शक्ति प्रदान करने की कामना करते हैं।
          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/ समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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