Tuesday, March 13, 2018

उपासना और प्रार्थना से मनुष्य प्रभु के करीब आता है

मोहम्मदी खीरी नगर के अस्थल धर्मशाला प्रांगण में चल रहे रामाश्रम सत्संग मथुरा के आचार्यगणो ने गुरु की महिमा व सत्संग के लाभ के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हमें इस वाणी का बोलना इस से काम लेना साधना से ही होता है जो यहां बताई जाती है । बेदो में बताया गया है कि स्तुति उपासना और प्रार्थना के क्रम पर चलकर मनुष्य उस सद चित आनंद रूपी ब्रह्म के देश में जल्दी पहुँच सकता है उसका दर्शन लाभ कर सकता है । स्तुति कीर्ति या  बड़ाई का वर्णन करने को कहते हैं। उपासना होठ जिह्वा  और मन को स्थिर कर ऐसी कल्पना करने को बोला जाता है जिसमें जिज्ञासु ऐसा ख्याल बाँधता है कि हम उसके बिल्कुल समीप और सम्मुख बैठे हैं और वह हमको देख रहा है । रोजाना के अभ्यास से संकल्प को इतना द्रढ और पुख्ता बनाते हैं कि वह वस्तु आगे चल के प्रतक्ष्य रुप से हमारे सामने आ जाती है और यह हमारा अनुभव इतना पक्का हो जाता है कि जिस में संदेह की गुंजाइश नहीं रहती ।इस अवस्था को उपासना बोला जाता है यद्यपि उपासना में द्वैत रहता है हम और वह । यह दोनों भाव उसमें काम करते हैं अपना अस्तित्व ही रहता है और प्यारे प्रभु भी सम्मुख भासते हुए जान पढ़ते हैं फिर यह दशा बड़ी आनंदमई और शांति दायक होती है इसने इतना आकर्षण होता है कि मन और प्राण में विभोर खो जाते हो साकार उपास को को इस स्थान पर अपने इष्ट के साकार रुप में और निराकार वादियों को निराकार दर्शन होते हैं ।साधकों को एक बात और भी याद रखने की है कि यह अवस्था बीच की है । वास्तविक दर्शन आनंदमय कोश मे पहुंचकर मिलता है। जनपद शाहजहाँपुर से पधारे आचार्य श्याम मोहन टंडन व  लखनऊ से पधारे आचार्य श्री शर्मा जी एवं गोला से आचार्य गया प्रसाद वर्मा ने गुरु महिमा व सत् विचारो से आए हुए साधको का मन मोह लिया । ब्रम्हलीन आचार्य राजपाल सिंह के भाई परमानंद सिंह ने जनपद शाहजहाँपुर से आकर उम्र लगभग 88वर्ष ने सत संग का लाभ उठाया ।इस मौके पर सैकडो की संख्या मे भक्तजन मौजूद रहे ।

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