Monday, March 26, 2018

नवरात्रि पर कन्याओं का महत्व और आम जीवन मे इसका अमल मतीन अहमद की जुबानी

नवरात्र के समय मे शहर का माहौल भक्ति मय हो जाता है। हमारा शहर एक ऐसा शहर है जहां सभी धर्मों के त्योहारों को बड़े हर्षोल्लास व सौहार्द के साथ मनाया जाता है।  ज्यादातर लोग नवरात्र मे व्रत भी रखते हैं। सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दिन कन्याओं को भी जिमाया (भोजन करना) जाता है। इन तीन दिनों मे कन्याओं का एक अलग महत्व होता है। इन दिनों मे कन्याओं के माता के सारे रूप देखे जाने की मान्यता है। हर व्रत रखने वाला पहले कन्याओं को भोजन करता है भोजन के बाद उनके पैर धोए और छुए जाते हैं। छोटी छोटी बच्चियां सजधज कर एक घर से दूसरे घर भोजन ग्हण करने जाती हैं। इतना भक्तिमय माहौल देखकर कोई भी अंदाजा नही लगा सकता कि जो लोग कन्या को देवी का दर्जा दे रहे थे वही लोग नवरात्रे खत्म होते या उसले पहले राक्षस कैसे बन जाते हैं। क्यों हम लोग महिलाओं और कन्याओं को सम्मान नही दे पाते। आखिर अचानक कैसे मर जाता है हमारा ज़मीर। क्यों हम किसी महिला या लड़की के साथ छेड़ खानी करते वक्त भूल जाते हैं कि हमारे घरों मे भी मॉ, बेटी और बहन हैं। हम क्यों भूल जाते हैं कि जो आज हम दूसरी महिलाओं के साथ कर रहे हैं कल वो हमारी मॉ बेटियों के साथ भी हो सकता है। हम रोज अखबारों मे पढते हैं कि फलॉ जगह लड़की का अपहरण कर उसका बलात्कार कर फेंक दिया गया। आखिर क्या हो गया है हमारी मानसिकता को। आज के समय मे कोई लड़की रात मे अगर कहीं से आने मे लेट हो जाए तो उसके परिवार और वो खुद घबरा जाती है। किसी भी अनजान व्यक्ति को देखकर क्यों वो सहम जाती है। क्या हम लोगों का फर्ज नही बनता कि अगर हमे कोई अकेली लड़की या महिला दिखे तो उसकी हर सम्भव मदद की जाए। बाहर के देशों मे दूर दराज के इलाकों मे महिलाएं अकेले ही घर से निकल कर अपना काम निपटा कर सकुशल घर वापस आ जाती हैं पर हमारे समाज क्यों महिलाएं सुरक्षित नही,अब समय आ गया है हम अपनी संकीर्ण सोच को बदलकर महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा दें और समाज को बदलें।

  निवेदक,अमीन अहमद
     महामंत्री आज़ाद प्रेस क्लब स्योहारा,बिजनोर।

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