Thursday, March 29, 2018

लोग हर मोड़ रुक रुक के सम्हलते क्यों है इतना डरते है तो फिर घर से निकलते क्यो है

लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं।
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं।

मैं न जुगनू हूँ, चाँद दिया हूँ न कोई सितारा हूँ।
फिर भी रोशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यों हैं।

नींद से मेरा त'अल्लुक़ ही नहीं बरसों से दोस्तों।
ख्वाब आ आ कर मेरी छत पे टहलते क्यों हैं।

मोड़ होता है ये जवानी का संभलने के लिए।
फिर भी सब लोग यहीं आके फिसलते क्यों हैं।

कर्नाटक में चुनाव की डेट घोषित होने से पहले ही बीजेपी की आईटी सेल ने चुनावों की तारीख की घोषणा कर दी.  चुनाव आयोग से अच्छा काम तो एक नौसीखिया प्रेमी कर लेता है। प्रेमिका को सरप्राइज तो दे ही देता है। यहां चुनाव आयोग के अगले कदम की खबर बीजेपी के आईटी सेल को हो जाती है। कर्नाटक का चुनाव अब घर की बात है।लेकिन यह भूल जाती है कि कांग्रेस सबसे ज्यादा घाघ पार्टी है। वो देश में इमरजेंसी लगा चुकी है। उसके बाद डर गई थी और खुद इमरजेंसी का नाम लेने से कतराती थी। अब देख रही है कि देश तो ऐसे भी चल सकता है। इसलिए अगली बार जब वो सत्ता में आएगी तो शहद में लपेटकर देश को ऐसे हांकेगी कि पूछना मत! फिर मीडिया समेत बाकी सब अगर बाप-बाप ना चिल्लाए तो कहिएगा। मज़ाक समझ रखा है देश को क्या??और कोबरा पोस्ट पे क्या बोलें? सेल्स और मार्केटिंग का आदमी पैसा लेकर मालिक से बात करेगा कि इतने करोड का बिजनेस आया है। बस देश में कुछ दिनों तक नफरत फैलाना है। अखबार और टीभी चैनल का मालिक कहेगा कि शाबाश! एडिटर को बोल देना कि ये खबर प्रायोरिटी पे चलाए। बिज़नेस आया है। पैसा नहीं आएगा तो खाली कंप्यूटर पे ताकझांक करने वाले एडिटोरियल के इन घोचुओं को तनख्वाह कौन देगा? और हां, इसी तरह स्पेस बेच के बिजनेस लाते रहो। और क्या बोलूं? पंजाब नेशनल बैंक दीवालिया घोषित होने वाला है! और नीरव मोदी व चौकसी विदेश में बिरयानी खा रहे हैं! तो गलत क्या है? आप भी बन जाइए विजय माल्या! सरकार क्या-क्या करेगी भाई? अब बैंक भी सरकार चलाएगी क्या? राष्ट्र प्रेम में अपने बैंक के पैसे भी कुर्बान नहीं कर सकते? कैसे देशभक्त हो यार!! हाय पैसा-हाय पैसा!! मरोगे तो साथ ले के जाओगे? अच्छा हुआ नीरव मोदी और चौकसी जैसे लोग ले गए। उनका शुक्र अदा करो। और पीएनबी कंगाल घोषित हो जाएगा तो क्या हुआ? इस देश में ससुरे बैंकों की कमी है क्या? थोड़ा माल लेकर तुम भी डिफाल्टर बन जाना! क्या दिक्कत है?और क्या लिखूँ! ये कि राजा हरिश्चंद्र बनने का ठेका सिर्फ मैंने ले रखा है क्या? और जो मीडिया में हैं, वो क्यों नहीं खबर चला रहे? क्या सेल्स वालों ने अखबार और टीभी का स्पेस यहां भी बेच दिया है?? और पब्लिक खुद कुछ क्यों नहीं बोलती??
ऐसा है ये देश सबका है। इसलिए जो गलत है वो गलत है। अगर आज आप गलत को सही बोलेंगे तो कल जब अगली पार्टी सत्ता में आएगी तो वो इससे दो कदम आगे ही निकलेगी। अभी तो अनशन कर रहे बाबा रामदेव पे सिर्फ पुलिस की लाठियां चली थीं और उनको जनाना अवतार में भागना पड़ा था। अबकी बार पुलिस से लेकर अदालत तक अगले सत्ताधारी के बोल बोलेंगे, तब बाप-बाप और माई-माई ना चिल्लाईएगा। नजीरें ऐसे ही बनती हैं। देश संविंधान और सिस्टम से चलता है, किसी पक्ष या विचारधारा से नहीं। अगर आप चलाएंगे तो कल वो भी चलाएंगे। और आप से वो 20 ही साबित होंगे, 19 नहीं। इसलिए लक्ष्मण रेखा मत क्रॉस करिये। वरना ख़ामोख्वाह समुंदर क्रॉस करना पड़ेगा और इस वानर सेना के पास तो कोई राम भी नहीं हैं जिनका नाम पत्थर पे लिखके वो समुंदर पे पुल बना लेंगे। ये तो समुंदर में ही जल समाधि बना डालेंगे और भूखी शार्क के भोजन बनेंगे।यकीन ना आये तो देख लीजिएगा। सत्ता क्रूर होती है। लोकतंत्र तो लबादा है। और ये लोकतंत्र स्विट्ज़रलैंड जैसे देश के लिए है जहां हर छोटी बात पे जनमत संग्रह हो जाता है। सवा अरब की आबादी पहले अपना पेट भरेगी कि लोकतंत्र की चिंता करेगी।
लेखक  अजय शर्मा हिंदुस्तान अखबार के पूर्व पत्रकार है।

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