Wednesday, March 21, 2018

सियासी महाभारत में राजनीतिक कौरव और पांडव

अबतक राजनैतिक क्षेत्र में कौरव पांडव नहीं होते थे बल्कि पक्ष विपक्ष जनसेवक की भूमिका निभाते थे।इसी तरह सियासत में चुनावी घमासान होता था लेकिन कभी महाभारत नहीं होती थी। एक बार महाभारत द्वापर में कौरवों के बीच धर्म अधर्म को लेकर हुआ था जिसमें कौरव हार गये थे और पाँच पाण्डव जीत गये थे। कौरवों के सामने पाँच पाण्डव इसीलिए युद्ध जीत गये थे क्योंकि वह धर्म की राह पर थे और भगवान उनके रथवान थे। दूसरे महाभारत की घोषणा परसों कांग्रेस के महाअधिवेशन के दूसरे दिन कांग्रेस के अगुवा राहुल गांधी ने की है।सियासी महाभारत में भाजपा को कौरव और अपनी कांग्रेस को पांडव के प्रतीक के रूप में पेश करके राहुल गांधी जी ने आगामी 2019 में होने जा रहे लोकसभा चुनावों की रणभेरी बजा दी है। उन्होंने कहा है कि भाजपा कौरवों की तरह सत्ता की लड़ाई लड़ने के लिए बनी है जबकि कांग्रेस की बुनियाद ही सत्य के लिए संघर्ष करना रहा है। राहुल गांधी जी ने भाजपा को संगठन की आवाज तो कांग्रेस को देश की आवाज बताते हुए कहा कि आज स्थिति कुरुक्षेत्र जैसी हो गयी है और यह अब सवाल है कि झूठ के साथ जीना है या फिर  सच्चाई सच्चाई का सामना करना है। राहुल गांधी ने जिस तीखे तेवर से अधिवेशन को संबोधित किया है उससे लगता है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी भाजपा से महाभारत का ऐलान कर दिया है और समय आते ही चुनावी कुरुक्षेत्र में दोनों कौरव पाण्डव के रूप में आमने सामने आ जायेगें।भाजपा और कांग्रेस में छिड़ी सियासी लड़ाई  आखिरकार कौरव पांडव के महाभारत में बदल गयी है। भाजपा अपने को पांडव और कांग्रेस अपने को पांडव मान रही है और ऐसी दशा में मतदाता ही तय करेगेँ कि आगामी चुनाव में कौन कौरव है और कौन पांडव है। राहुल गांधी ने महाअधिवेशन में भाजपा को कौरव.कहकर कांग्रेस में एक नयी राजनैतिक उर्जा भर दी है इसीलिए पूरा अधिवेशन भाजपा और आगामी लोकसभा चुनाव पर केंद्रित रहा और सभी ने पानी पी पीकर भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री पर हमला बोला है।महाअधिवेशन के जरिये कांग्रेस ने यह साबित करने का प्रयास किया है कि वहीं भाजपा का मुकाबला कर सत्ता परिवर्तन कर सकती है।
          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/ समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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