Wednesday, March 21, 2018

विश्व कविता दिवस पर कविताओं का संगम

कानपुर-(विश्व कविता दिवस) की पूर्व संध्या पर पत्रकारिता को अनूठे मुकाम और कविताओं को अद्भुत आयाम देने वाली बहुचर्चित शख्शियत, जिंदादिल इंसान वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रख्यात कवि प्रमोद तिवारी जी की स्मृति में "कानपुर जर्नलिस्ट क्लब" के तत्वावधान में श्रद्धांजलि सभा एवं प्रमोद जी के साथी कवियों द्वारा कविताओं के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि दी गयी। बीएनएसडी शिक्षा निकेतन स्कूल सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने प्रमोद जी के स्मरणों को सभी साझा किया। कवियों ने कविताओं के माध्यम से उनके व्यक्तिगत पर प्रकाश डाला। श्रद्धांजलि सभा में जुटे लोगों ने उनसे से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए दुख जताया वरिष्ठ पत्रकार अंजनी निगम ने कहा पत्रकार/ गीतकार प्रमोद तिवारी का असमय इस दुनिया से विदा लेना हिंदी  गीतों के लिए बहुत बड़ी क्षति है। वही कवि लोकेश शुक्ला ने कहा कि दस पैसे में दो चूरन की पुड़ियों वाले दिन’ याद दिलाने वाले प्रमोद तिवारी नहीं रहै उन्होंने ने कहा प्रमोद तिवारी वरिष्ठ पत्रकार रहे और कविता की दुनिया में भी खासा नाम कमाया-सच है गाते गाते हम भी थोड़ा सा मशहूर हुए/ लेकिन इसके पहले पल-पल,तिल-तिल चकनाचूर हुए/ चाहे दर्द जमाने का हो चाहे हो अपने दिल का/ हमने तब-तब कलम उठाई जब-जब हम मजबूर हुए।
अपने गीतों की तरह ही आप बहुत याद आएंगे 
अन्य कवियों ने भी अनेक कविताएं गाकर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी एक कवि ने कहा कवि सम्मेलनों में जैसे आम की बौर थे प्रमोद तिवारी । उन को सुन कर बौर की तरह ही मन झूम-झूम जाता था । अपने सहज-सरल , मस्त और मीठे गीतों से वह हर किसी को बरबस मोह लेते थे । जैसे कलेजा काढ़ लेते थे । अपनी अंतिम रात में भी प्रमोद तिवारी जी ने यही किया । कलेजा काढ़ कर रुला कर चले गए । यह प्रमोद तिवारी का एक्सीडेंट नहीं था , हिंदी गीतों का एक्सीडेंट था । ऐसे गीत , ऐसा कंठ और ऐसी निश्चलता हिंदी गीतों को अब कहां मिलेगा प्रमोद तिवारी । अपने गीतों की तरह ही आप बहुत याद आएंगे प्रमोद तिवारी । आप के गीत , आप की दोस्ती , आप का याराना अब दुर्लभ है । दस पैसे में वह पूड़ियों वाले दिन तो अब बिला गए , बिला गए वह गुड्डे गुड़ियों वाले दिन बिला गए । रास्तों के रिश्ते अब कहां मिलेंगे प्रमोद तिवारी । आप की फकीरी भरी ज़िंदगी और गीतों की गमक अब सूनी हो गई है । यह भी कोई उम्र थी जाने की गाकर अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दी। श्रृद्धाजंली सभा में बड़ी संख्या में व्यापारियों, राजनैतिज्ञों, पत्रकारों व सामाजिक संगठनों के लोग पहुँचे।कवि लोकेश शुक्ला, कमल मुसद्दी, ओमप्रकाश, विशाल,मुकेश श्रीवास्तव,कपिल दुबे।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से जीएसटी कमिश्नर चंचल तिवारी,पूर्व शिक्षा मंत्री अमरजीत (जनसेवक),पूर्व मेयर जगतवीर  सिंह द्रोण, पूर्व विधायक सतीश निगम, पूर्व विधायक रघुनंदन भदौरिया,सुरेंद्र मैथानी, हर प्रकाश अग्निहोत्री,अतर नईम,
एडवोकेट नरेश चन्द्र त्रिपाठी, अनूप कुमार द्विवेदी, रतन अग्रवाल,सपा नेता रतन गुप्ता, व्यापारी नेता विजय पांडेय, अवधेश बाजपेयी,संजय मल्होत्रा, मनोज चौहान।वरिष्ठ पत्रकार दिलीप शुक्ला, अंजनी निगम,जर्नलिस्ट क्लब के चेयरमैन सुरेश त्रिवेदी, वरिष्ठ पत्रकार राजेश द्विवेदी,दुर्गेन्द्र चौहान, विवेक खरे,कृष्ण कुमार त्रिपाठी, जर्नलिस्ट क्लब अध्यक्ष अनुज शुक्ला, महामंत्री ओम बाबू मिश्रा, उपाध्यक्ष सर्वेश मिश्रा व अभय त्रिपाठी, मंत्री श्याम तिवारी, विक्की रघुवंशी व संयुक्त मंत्री नीरज तिवारी व तरुण अग्निहोत्री,वरिष्ठ पत्रकार कैलाश अग्रवाल, गौरीशंकर भट्ट, गौरव चतुर्वेदी, पुष्कर बाजपेयी, रितेश शुक्ला,शैलेंद्र मिश्रा, सुनील तिवारी, चन्द्र प्रकाश गुप्ता, अनिल त्रिवेदी,रामजी पाण्डेय, बृजेश दीक्षित,मयंक शुक्ला,शरद त्रिपाठी, शाहिद पाठान, सौरभ सिंह,आशीष त्रिपाठी,उमेश द्विवेदी, प्रशान्त त्रिपाठी, आनंद मिश्रा,सोनू सिंह,नारायण दीक्षित, वरुण जयसवाल, उमेश शुक्ला, सहित सैकड़ों पत्रकार मौजूद थे। साथ ही अधिवक्ता मिथुन शुक्ला, जिम्मी भाटिया, वीरू श्रीवास्तव,आशुतोष अवस्थी, ओमकार विश्वकर्मा, सपा नेता अजय यादव समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

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