Saturday, March 17, 2018

राजनीति में बढ़ता जातिधर्म और नेताओं के भड़काऊ बोल

राजनीति में काम कम बयानबाजी अधिक की परम्परा रही है। राजनीति और राजनेता समाज को जोड़ने वाले होते हैं उसे खंडित करने वाले नहीं होते हैं।धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में सभी धर्म सम्प्रदायों को अपने रीति रिवाज से रहने खाने और पर्व मनाने की खुली छूट होती है।इसमें सभी लोग अपना अपना त्यौहार अपने अपने ढंग से मनाते हैं और एक दूसरे को शैतान नहीं कहते हैं। राजनीति में राजनेता एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि होता है और वह कभी मजहब विशेष की नहीं बल्कि समस्त समाज की बात करता है। इधर मजहबी राजनीति का दौर शुरू हो गया है और साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ कर राजनैतिक रोटियां सेंकी जाने लगी है।राजनेताओं की जुबान से निकले चार शब्द समाज में जहर घोलकर कौमी एकता को प्रभावित करने लगते हैं।इधर राजनीति में जाति धर्म सम्प्रदाय का बोरबाला होता जा रहा है जो लोकतंत्र के भविष्य के लिए उचित नहीं कहा जायेगा।इधर कुछ दिनों से साम्प्रदायिक सद्भाव बना हुआ था और मजहबी भड़काऊ बयानबाजी कुछ कम थी किंतु गोरखपुर फूलपुर लोकसभा उपचुनावों के परिणाम समाजवादी पार्टी के पक्ष में आते ही अपने बेतुके विवादित भड़काऊ बयानों के चर्चित सपा के बहुचर्चित नेता आजम खाँ की जुबान पर पिछले एक साल से लगा ताला खुल गया है।उन्होंने एक बार फिर प्रदेश में साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाला बयान देकर हलचल पैदा कर दी है। आजम खाँ साहब पुराने अनुभवी नेता हैं तथा हिन्दू मुस्लिम दोनों उनके समर्थकों में रहे हैं इसके बावजूद परसों पूर्व मंत्री लालजी वर्मा के पुत्र की दुर्घटना में हुयी मौत पर शोक संवेदना व्यक्त करने अम्बेडकर गये थे।वहाँ से वापस लौटते समय इल्तिफातगंज में ब्लाक प्रमुख डा० खुशनुमा नजीब खाँ के घर पर पत्रकारों से बात करते हुए कह दिया कि जो ईद नहीं मनाते हैं वह शैतान होते हैं।संभवतः आजम खाँ साहब का बयान प्रदेश के मुख्यमंत्री योगीजी के उस बयान के जबाब में आया जिसमें उन्होंने विधानसभा में कहा था कि वह ईद नहीं मनाते हैं और न टोपी लगाते हैं। योगीजी ने सिर्फ इतना कहा और किसी मजहब शैतान नही कहा है लेकिन आजम खाँ ने यह कहकर पूरे गैर मुस्लिम समुदाय को शैतान बना दिया है जबकि सभी जानते हैं कि धर्मनिरपेक्ष देश में हर एक के त्यौहार अलग अलग होते हैं।अधिकांश मुस्लिम होली दिपावली नही मनाते हैं तो अधिकांश हिंदू ईद मोहर्रम भी नही मनाते हैं।इसका मतलब यह तो नहीं हुआ कि जो होली दीपावली नहीं मनाते हैं वह सभी शैतान हो गये।आजम खाँ साहब का कहना इस्लाम मानने वालों पर सही है क्योंकि जो मुस्लिम ईद नही मनाता है उसकी तुलना इब्लीस से की गयी है।असलियत तो यह है कि न ईद मनाने शैतान होते हैं और न होली दीपावली मनाने वाले शैतान होते हैं। शैतान तो राजनीति होती जा रही है जिसके लिये जानबूझकर ऐसे भड़काऊ बयान देने पड़ते हैं। राजनैतिक महत्वाकांक्षा को बुलंदियों पर पहुंचाने के लिए धर्म जाति और सम्प्रदाय का सहारा लेना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।आजकल राजनीति में हिन्दू मुस्लिम दोनों समुदाय के कुछ ऐसे बदजुबान नेता हैं जिन्हें राजनैतिक भाषा में फायर ब्रांड कहा जाने लगा है।यहीं फायर ब्रांड नेता समाज में साम्प्रदायिक जहर उगलकर लोगों को भड़का कर चुनाव सन्निकट आते ही राजनैतिक रोटियां सेंकने लगते हैं। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाए
           भोलानाथ मिश्र
  वरिष्ठ पत्रकार/ समाजसेवी
रामसनेहीघाट,बाराबंकी यूपी।

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