Wednesday, March 21, 2018

राजनीति और धर्मनीति का समावेश -भोला नाथ मिश्रा की कलम से

राजनीति और धर्मनीति दोनों अलग अलग होते हैं और अबतक यह माना जाता था कि दोनों एक साथ सम्पादित नहीं किये जा सकते हैं। माना जाता है कि लोकतंत्र में राजनीति के साथ धर्मनीति का समावेश होने से राजनीति लोक कल्याणकारी मानवीय मूल्यों से जुड़ जाती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में अब तक खद्दरधारी नेता ही शासन की बागडोर संभालते थे आज तक कभी धर्मशास्त्र से जुड़ा साधु संयासी बैरागी के हाथ में सत्ता की लगाम नहीं आयी थी।वैसे विभिन्न दलों में तमाम साधु संत महात्मा एम एल एऔर एमपी के रूप में मौजूद हैं।इधर पिछले पिछले तीन चार दशकों से राजनीति में धर्मनीति का समावेश तेजी से हुआ है और मतदाताओं तक को धर्म मजहब में वोट पाने के लिए विभाजित कर दिया गया है। गोरखपुर में नाथ सम्प्रदाय आजादी के समय से ही राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है यह ड्यौढ़ी शिव अवतारी गुरु गोरखनाथ जी से जुड़ी हुई है और आज भी अपनी एक अलग पहचान है।यह धार्मिक ड्यौढ़ी भले ही आजादी के बाद से ही राजनीति में सक्रिय रही हो लेकिन सरकार की बागडोर हाथ में कभी नहीं रही। यह पहला मौका है जबकि गोरक्षपीठ के महंत योगी आदित्यनाथ जी के हाथ में सत्ता की बागडोर आयी है।इस गोरक्षपीठ की खूबी यह है कि इसमें सभी ब्रह्मचारी और घर परिवार से विरत लोग ही रहते हैं और घर घर गाँव गाँव सरंगी बजाकर भिक्षा मागंने के बाद अपने माता पिता पत्नी से भिक्षा मांगनी पड़ती है तब जाकर छोटे महंत बनने का नम्बर आता है।योगीजी पहली बार राजनीति  धर्मनीति के साथ कर रहे हैं और योगी बाबा की अगुवाई वाली सरकार को बने एक साल पूरा हो गया है। इस समय सरकार अपने एक साल की उपलब्धियों का बखान कर रही है।शपथग्रहण के तुरंत बाद शुरू हुआ योगीजी का अभियान अभी भी जारी है यह बात अलग है कि साल भर व्यवस्था की गाड़ी को पटरी पर लाने में लग गया है। यह पहला मौका था जबकि प्रशासनिक अधिकारियों को मुख्यमंत्री के रूप में संत महात्मा तेज तर्रार अपने धर्म के कट्टर ईमानदार परिश्रमी व्यक्ति मिला।एक साल तो उन्हें विचारधारा एवं कार्यशैली में बदलाव लाने में बीत गया। चुनावी संकल्प पत्र के अनुरूप किसानों का कर्जा माफ करने में एक साल लग गया फिर भी अभी पूरी तरह से योजना का लाभ सभी पात्र कृषकों को नहीं मिल सका है। योगीजी के कड़े तेवर के चलते बिना लायसेंसी बूचड़खाने बंद हो गये फलस्वरूप गोवंशीय पशुओं की बाढ़ आ गयी और साल भर यह किसानों और राजमार्गों के साथ योगीजी के सिरदर्द बने रहे। सरकार बनने के बाद प्रदेश में अपराध भी हुये और तमाम कुख्यात अपराधी मुठभेड़ में मारे भी गये। सरकार प्रदेश में आद्यौगिक वातावरण प्रदान करने में कामियाब रही और साल के अंत में समिट 2018 का सफल आयोजन इस दिशा में मील का पत्थर तब साबित होगा जबकि इसमें पूजी निवेश की हुयी घोषणाएं मूर्ति रुप ले ले।योगीजी को पूरा साल सिर्फ प्रशासनिक ढांचे को ठोक पीटकर शुद्ध करने और अपनी विचारधारा में समाहित करने में लग गये हैं। धन्यवाद।।
           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/ समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी

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