Tuesday, March 13, 2018

राजनीति के अपराधीकरण और नेताओं पर लम्बित मुकदमे

सम्पादकीय
लोकतांत्रिक प्रणाली में राजनीति जैसे अपराधियों की शरण स्थली बनती जा रही है। राजनीति आजकल ईमानदार स्वच्छ बेदाग छबि वालों की जगह जैसे अपराधिक प्रवृत्ति वालों होती जा रही है। कुछ लोग राजनीति में आने से पहले अपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहते हैं और जब उनकी जान का खतरा पैदा हो जाता है तब वह चोला बदलकर राजनीति में नहीं आ जाते हैं बल्कि ऐनकेन प्रकारेण प्रधान प्रमुख जिला पंचायत अध्यक्ष विधायक सासंद तक बन जाते हैं।अपराधिक प्रवृति वाले जब राजनीति में सक्रिय हो जाते हैं तो उनकी जान व हनक दोनों बच जाती है। राजनीति ही लोकतंत्र की धुरी होती है जो सेवाभाव समर्पण पर टिकी होती है और सरकार का संचालन करती है।यहीं दागदार माननीय बनकर मंत्री मुख्यमंत्री तक बनकर देश प्रदेशवासियों की तकदीर लिखने लगते हैं और उनके इर्द गिर्द उनके पुराने अपराधिक प्रवृत्ति वाले साथी मंडराने लगते हैं। राजनीति में आने के बाद मुकदमा भी वापस हो जाते हैं तथा जेल जाने पर अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं होता है और वह वहाँ पर भी वीआईपी बने रहते हैं।जब अपराध और अपराधियों पर नियन्त्रण करने वाले ही अपराधिक प्रवृत्ति के होगें तो वह अपराध और अपराधियों पर अकुंश कैसे लगेगा ? आज कल संगीन अपराध राजनीति के संरक्षण में हो रहें हैं और जब तक संरक्षण नहीं होता है तबतक मारपीट भी करने की हिम्मत नहीं होती है। राजनीति के हो रहें अपराधीकरण को लेकर चर्चाएं तो अरसे से हो रही है लेकिन नियन्त्रण अबतक भी नही हो पाया है।पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने इस दिशा में एक अनूठीं पहल करते हुए केन्द्र सरकार से ऐसे सासंदों विधायकों की संख्या व सूची पेश करने के लिये कहा था जिनके खिलाफ अपराधिक मुकदमें विचाराधीन हैं और जिसकी घोषणा उन्होंने चुनाव के पहले की थी।केन्द्र सरकार ने देश के सभी उच्च न्यायालयों के जरिये जानकारी एकत्र करके सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया है।हलफनामे के मुताबिक महाराष्ट्र को छोड़कर पूरे देश के सत्तरह सौ पैसठ सासंद विधायक ऐसे हैं जिनके ऊपर तीन हजार से अधिक मुकदमें विचाराधीन हैं।अपराधिक प्रवृत्ति के माननीयों में उत्तर प्रदेश सबसे अव्वल है जबकि तमिलनाडु व बिहार क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। कुछ ऐसे भी माननीय हैं जिनके ऊपर कई मुकदमें विभिन्न अदालतों में चल रहे हैं। दरअसल लगता है कि सुप्रीम कोर्ट में इन माननीय के खिलाफ चल रहे मुकदमों का अतिशीघ्र निस्तारण करके राजनीति को अपराधी मुक्त बनाने की दिशा में पहल चाहता है।कुछ राज्य इस दिशा में पहल करके विशेष अदालतों का गठन कर चुके है किन्तु कई राज्य इस दिशा में उदासीन हैं। राजनीति का अपराध मुक्ति होना लोकतंत्र के उज्जवल भविष्य के लिए अति आवश्यक है क्योंकि राजनीति ही लोकतंत्र में शासक प्रशासक की भूमिका निभाती है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः -------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/ समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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