Monday, April 2, 2018

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन 25 सालो से किसानों की लड़ाई लड़ता आ रहा है-राम शरण शर्मा

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन प्रभावी ढंग से पिछले 25 साल से किसान हित की आवाज के साथ किसान के परेशानियाँ व मसलो को कानूनन मान्यता दिलाता आ रहा है। जिसका कर्मभूमि अभी पिछले 2015 तक पश्चिमी उ प्र रही है।तदुपरांत अव इसका विस्तार की परिणति हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष का भरकस  प्रयास के तहतलखनऊ, लखीमपुर खीरी पूर्वी  उप्र तथा दक्षिण पश्चिमी उप्र के जमीन अधिग्रहण की कानूनी लडाई को कोर्ट के माध्यम से प्रतिरूप दिलवाया कि किसान की जमीन उसकी स्वेच्छा से अधिग्रहीत ही होगी अन्यथा वह राजी है तो चार गुना मुआवजा राशि देय होगी।
हम इसके साथ-साथ अपने संगठन के प्रयास को दक्षिण पश्चिमी उप्र मे प्रभावी सक्रियता से अधिगहण कानून बनवाने के साथ-साथ जिन मुद्दों पर केन्द्रित किए हुए है जिनके लिए किसान आयोग बनाने की जो हमारी मांग है उसमे समाहित होगे जो निम्न है:-

एक

दक्षिण पश्चिम उप्र मे आगरामंडल के आस-पास के एरिया व अन्य जगह  की जलविहीनता की समस्याओ व  अन्य  आवश्यक निराकरण 
--जिसके तहत फतेहाबाद व वाह के बीच फरोल नगरिया झाल सेतु का प्रस्तावित करने का सर्वे महत्वपूर्ण ;
वह इसलिए कि इसको राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन  के  एक घटक आगरामंडल संयोजक के स्वंय वित्त पोषित संस्थान" सर्वहित भारती" द्वारा सन 2005 से आन्दोलन का प्रतिरूप देना शामिल है। जो अति शीघ्र संगठन के प्रयासों को अन्य जगहो पर भी फलीभूत कराकर इन जल अभाव ग्रस्त जगहों को ठीक उसी प्रकार किसान हित मे साकार करेगा।

दूसरा

मंडल के कृषि उत्पाद विशेषकर आलू, लहसून, धान आदि के मूल्यांकन पर पैदावार के लिए
----- शोध उपरान्त आकलन करवाकर ही फसल की बुआई निर्धारण करवा कर ही फसल का प्रतिरूप दिलवाना किसान के समानुपात मे खेती करने के नियम से ही साकार हो पायेगा। इसके लिऐ अत्यधिक सरकारी कृषि विश्वविद्यालय की मान्यता, कृषि शोध संस्थान विकसित करवाना। जगह-जगह कृषि पर्यवेक्षक की सकारात्मक नियुक्ति जो ग्राउंड लेवल पर किसान के बीच जाकर काम करे, करवाना शामिल है।

तीसरा

जमीन अधिग्रहण के मसले मे कानूनन प्रतिरूप होगा कि किसान की पैदावार के लिहाज से विकसित भूमि चाहे वो एक्सप्रेस वे पर ही क्यों न हो व्यवसायिक उपयोग के लिए नही दी जाय। वैसे उद्योग संस्थान ऐसे ग्रामीण जगहो पर विकसित कराये जाय जहा कृषि गुणवत्ता पर जमीन ठीक नही मतलव वंजर व गैर उपजाऊ पठारी जमीन का ही अधिगहण ठीक होगा --- अविकसित जगहें विकसित होगी रोजगार नजदीक उपलब्ध हो पलायन रुकेगा । स्मार्ट गांव बनेगे।

और भी मसले हैं।

उपरोक्त झाल सेतु बैराज बन जाने से सूखाग्रस्त जगहो पर लघु व बृहत नहरीकरण संभव होने ऐसे जगह पर जल की बहुतायत संभव हो पायेगी और फसलें लहलहाती नजर आयेंगी।

जो हमारे टीम वी एम, राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार वीएमसिंह के आधारभूत सपनों को साकार करने का संगठन के प्रयासों से सापेक्ष कदम होगा।

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