Monday, April 2, 2018

दलित समाज ने आज भारत बंद का किया ऐलान

दलितसमाज ने दो अप्रैल को भारत बंद का ऐलान किया है। संगठनों ने भारत बंद को सफल बनाने के लिए जगह-जगह लोगों से इसमें शामिल होने का आह्वान किया है। वहीं प्रशासन ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए चौकसी कड़ी कर दी गई है। इसी बीच पंजाब सरकार ने सोमवार को स्कूल-कॉलेज बंद करने का ऐलान कर दिया है। राज्य भर में 4000 के करीब जवानों को तैनात किया गया है।
सरकार ने कल दिनभर इंटरनेटसेवा बंद करने के भी आदेश दे दिए हैं। राज्यभर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए गए हैं। पंजाब के प्रमुख सचिव करन ए सिंह ने केंद्र सरकार रक्षा सचिव को पत्र लिखकर सैन्य बलों की मांग की है ताकि कानूनव्यवस्था को कायम रखा जा सके। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी प्रदर्शन के दौरान दलित संगठनों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। बंद का आह्वान करने वाले संगठनों के साथ लगातार बातचीत की जा रही है। उन्हें आश्वासन दिया जा रहा है कि पंजाब सरकार दलितों के किसी भी अधिकार को नहीं छीनने दिया जाएगा।
बता दें कि सुप्रीमकोर्ट की ओर से एस.सी./एस.टी. एक्ट के संबंध में सुनाए गए एक फैसले से दलित समुदाय में रोष है। इस समुदाय के लोगों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार ने भी कोई रीव्यूपटीशन दाखिल नहीं की जिससे केंद्र सरकार का दलित विरोधी रवैया स्पष्ट होता है। इससे दलितों पर होने वाले अत्याचारों में वृद्धि होगी व उन्हें मिलने वाले इंसाफ की उम्मीद और मद्धम हो जाएगी। इसी रोष में देश भर में दलित संगठनों ने उक्त फैसले के खिलाफ 2 अप्रैल को भारतबंद का आह्वान किया है। अनुसूचितजाति एवं अनुसूचितजनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम 1989 को 11 सितम्बर, 1989 को संसद में पारित किया गया था। 30 जनवरी, 1990 को इस कानून को जम्मू-कश्मीर छोड़ पूरे देश में लागू किया गया। एक्ट के मुताबिक कोई भी ऐसा व्यक्ति जो कि एससी-एसटी से संबंध नहीं रखता हो, अगर अनुसूचित जाति या जनजाति को किसी भी तरह से प्रताड़ित करता है तो उस पर कार्रवाई होगी। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचारनिरोधक) अधिनियम, 1989 के तहत आरोप लगने वाले व्यक्ति को तुरंत गिरफ्तार किया जाएगा। जुर्म साबित होने पर आरोपी को एससी-एसटी एक्ट के अलावा आईपीसीकीधारा के तहत भी सजा मिलती है। आईपीसी की सजा के अलावा एससी-एसटी एक्ट में अलग से छह महीने से लेकर उम्रकैद तक की सजा के साथ जुर्माने की व्यवस्था भी है। अगर अपराध किसी सरकारी अधिकारी ने किया है, तो आईपीसी के अलावा उसे इस कानून के तहत 6 महीने से लेकर एक साल की सजा होती है।

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