Thursday, April 12, 2018

हवा हवाई निकला सरकार का कुपोषण मिटाने का दावा

आदर्श दुबे
कुशीनगर। केंद्र से लगायत प्रदेश सरकार तक सभी कुपोषण से बचने के लिए तमाम तरह के योजनाओ को संचालित करते रहते है लेकिन उसके बाद भी कुपोषण की समस्याए आये दीन सामने नजर आती दिख रही है इसका जीता जागता उदाहरण है  कुशीनगर जनपद का विकासखंड खड्डा आज भी 7207 बच्चे कुपोषण के शिकार हैं कुपोषण का समूल नाश करने के लिए डब्ल्यूएचओ से लगायत सरकार चाहे लाख योजनाओं को चालू कर कुपोषण मिटाने का दावा करें लेकिन यह झूठ है कुपोषण के शिकार बच्चों  की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर है वह सिर्फ फर्जी आंकड़े सरकार को प्रेषित कर वाह वाही लूटने में लगे हुए है।देश व प्रदेश में कुपोषण से बच्चों में बढ़ रही मृत्यु दर को कम करने के लिए डब्ल्यूएचओ से लगायत  सरकार ने कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य के लिए स्वास्थ्य केंद्रों व आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से अलग अलग योजना चालू किया लेकिन यह योजना जनपद स्तरीय अधिकारियों के भ्रष्टाचार के दलदल में फंसे होने के कारण भ्रष्टाचार की बलि चढ़ रही है और अधिकारीयों की हैसियत करोड़ों में हो गई जो जांच के बाद रहस्य खुल जाएगी विकासखंड खड्डा के 0 से 5 वर्ष तक के बच्चे कुपोषण के शिकार होने लगे है पूरे विकासखंड में 7207 बच्चे कुपोषण के शिकार होकर अपनी दयनीय दशा बयां करने लगे हैं फिर भी जिनके कंधों पर इस बीमारी से लड़कर दूर भगाने की जिम्मेदारी है वह भ्रष्टाचार रूपी दलदल में फंसकर अपने को असहाय बने हुए हैं जबकि सरकार इस विभाग के कर्मचारियों पर लगभग 15 लाख रुपए महीना खर्च वेतन के मद में करती है इस योजना में फैले भ्रष्टाचार को सरकार ने खत्म नहीं किया तो आने वाले दिनों में भ्रष्टाचार रूपी दानव भारत के भविष्य रूपी बच्चों को कुपोषण के चलते मार डालेंगे कहने की बात नहीं कि कुपोषण के मामलों में गरीबी, भूखमरी, अशिक्षा आदि अहम भूमिका निभाती है। गरीबी की मार के चलते बच्चों और माताओं को समुचित मात्रा में पौष्टिक भोजन नहीं मिल पाता, जिससे उनके शहरी में ऊर्जा, वसा, प्रोटिन, वसा, कार्बोहाईड्रेट्स जैसे आवश्यक तत्वों की भारी कमी हो जाती है। इसी वजह से देश की 75 प्रतिशत ग्रामीण महिलाएं एनीमिया रोग (खून की कमी) का शिकार हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 63 फीसदी बच्चों को भरपेट खाना नहीं मिल पाता है और कई बार उन्हें भूखे पेट ही सोना पड़ता है। इसका बच्चों पर भारी कुप्रभाव पड़ रहा है। इसलिए, देश-प्रदेश की सरकारों द्वारा कुपोषण के खिलाफ कारगर कदम उठाने की सख्त आवश्यकता है। कुपोषण का कारण बनने वाली परिस्थितियों गरीबी, भूखमरी, स्वास्थ्य आदि हर स्तर पर व्यापक एवं ठोस नीतियां धरातल पर उतारना बेहद जरूरी है। इसके लिए गरीबों की पूरी गम्भीरता के साथ सुध लेनी होगी और गरीबी-उन्मूलन के लिए ईमानदार प्रयास करने होंगे।कुल मिलाकर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय सर्वेक्षणों, अध्ययनों और शोध रिपोर्टों के सनसनीखेज आंकड़े स्वतंत्रता के सात दशक पूरे करने जा रहे रहे विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत के लिए न केवल चिन्तनीय एवं चुनौतिपूर्ण हैं, बल्कि, बेहद शर्मनाक भी हैं। देश से भूखमरी व कुपोषण को मिटाने के लिए अचूक कारगर योजनाओं के निर्माण एवं उन्हें ईमानदारी से क्रियान्वित करने, सरकार की दृढ़ इच्छा शक्ति और स्वास्थ्य व शिक्षा के स्तर को सुधारना बेहद जरूरी है।

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