Sunday, April 15, 2018

देश मे तेजी से बढ़ रही रेप की घटनाएं सरकारें आखिर चुप क्यों

अन्याय अन्याय होता है चाहे गरीब के साथ हो चाहे अमीर के साथ या फिर चाहे हिन्दू के साथ हो या मुसलमान सिख ईसाई के साथ हो।इसी तरह दुष्कर्म चाहे जिस जाति धर्म अथवा मजहब के साथ हो लेकिन वह दुष्कर्म होता है। महिलाओं के साथ दुष्कर्म कोई पहली बार नहीं हुआ है बल्कि यह होता रहता है और देश में कहीं न कहीं रोजाना दुष्कर्म करने अथवा उत्पीड़न की घटनाएं होती रहती हैं।इनमें कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जो चर्चा में आ जाती थी तो तमाम घटनाएं ऐसी भी होती हैं जो चर्चा में नही आ पाती हैं।जो घटनाएं सत्ता दल से जुड़ जाती हैं उन्हें विपक्ष अपना मुद्दा बना लेता है और वह सुर्खियों में आकर सरकार के लिए समस्या बन जाती हैं।लड़कियों बच्चियों एवं महिलाओं के साथ अन्याय उत्पीड़न एवं दुष्कर्म की घटनाएं हर राज्य में और हर वर्ग के साथ होती रहती हैं। इस समय देश की दो दुष्कर्म की घटनाएं ऐसी हैं जो सत्तारूढ़ दल से जुड़ी हुई हैं इसलिए इन लोन घटनाओं को लेकर विपक्षी और अदालत दोनों स्वतः संज्ञान में लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।सरकार विपक्ष के सामने जैसे बौनी साबित होने लगी है और प्रधानमंत्री गृहमंत्री तथा मुख्यमंत्री तक को सफाई देनी पड़ रही है।इस समय उत्तर प्रदेश में उन्नाव जिले तथा जम्मू कश्मीर के कठुआ में हुयी दुष्कर्म की घटनाएं देश में चर्चा की विषय बनी हुई हैं और दोनों घटनाओं ने भाजपा सरकारों को हिलाकर रख दिया है।हालांकि दोनों घटनाओं में जमी आसमान का फर्क है और उत्तर प्रदेश की घटना एक साल पुरानी आरोप के आधार पर आधारित है जबकि जम्मू कश्मीर के कठुआ की घटना तीन महीने पहले की है। कठुआ कांड की तुलना उन्नाव जिले की घटना से नहीं किया जा सकता है क्योंकि उन्नाव की घटना में मारपीट उत्पीड़न और पुलिस की शिथिलता अकर्मण्यता मुख्य है जबकि कठुआ की घटना हैवानियत से परिपूर्ण मानवता को शर्मसार करने वाली है। इस घटना के आरोपियों का समर्थन करने और घटना को साम्प्रदायिक रंग देने के आरोप में जम्मू कश्मीर की सरकार में शामिल भाजपा के दो मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ चुका है वहीं उन्नाव जिले की घटना में आरोपित वहां के भाजपा विधायक को उनके भाई के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है।कठुआ में बच्ची के साथ जिस तरह का घिनौना कृत्य किया गया उसे इंसानियत तार तार हो गयी है तो उत्तर प्रदेश में पुलिस ने जो भूमिका निभाई उसे संवैधानिक मर्यादाओं और मित्र पुलिस का चेहरा कंलकित हुआ है। कठुआ में गत 17 जनवरी को  जंगल से लापता बच्ची का शव बरामद किया गया था। बालिका को अपहरण करके एक हफ्ते तक गांव के ही एक मंदिर में रखा गया था और उसे नशीली दवाएं खिलाकर आधा दर्जन इंसानी खाल ओढ़े वहशी हैवानों ने बार बार उसके साथ हैवानियत करके जंगल में ले जाकर हत्या कर दी थी। पुलिस इस मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र भी दाखिल कर चुकी है इसी तरह उन्नाव में भी अपहरण का मुकदमा विचाराधीन है। उन्नाव का मामला मारपीट के बाद आत्मदाह की घोषणा के बाद गिरफ्तारी और जेल में पिता की मौत के बाद सुर्खियों में आया तो कठुआ का मामला आरोपियों के बचाव में आयोजित एक धार्मिक आयोजन में मंत्रियों के शामिल होने के बाद सुर्खियों में आया और आधीरात कांग्रेस के खेवनहार राहुल गांधी ने कैंडल मार्च निकालकर इस मामले को बुलंदियों पर पहुंचाकर सरकार को कटघरे में पहुंचा दिया है। दोनों घटनाएं अपने आप आप में निहायत घटिया निंदनीय है चाहे उन्नाव जिले की किशोरी के पिता के साथ अमानवीय मारपीट गिरफ्तारी और मौत हो चाहे कठुआ की आठ साल की मासूम बच्ची के साथ बर्बरता एवं हैवानियत हो।सवाल कठुआ और उन्नाव जिले की घटनाओं का नहीं सवाल तो देश में  रोजाना होने वाली दुष्कर्म हैवानियत भरी महिलाओं के साथ दुष्कर्म एवं प्रताड़ना की घटनाओं को भी इसी तरह संज्ञान में लिया जाना चाहिए चाहे उत्तर प्रदेश हो चाहे बंगाल बिहार उड़िसा कर्नाटक दिल्ली महाराष्ट्र आदि राज्य हो। राजनेताओं और राजनैतिक दलों की हमदर्दी सिर्फ उन्हीं घटनाओं से होती जिनसे उनका उल्लू सीधा होना होता है। जिस तरह से उन्नाव और कठुआ मामले में उच्च न्यायालयों ने स्वतः संज्ञान लेकर तेजी दिखाई है उसी तरह दुष्कर्म एवं अन्याय की अन्य घटनाओं को भी संज्ञान में लेकर पीड़ित को न्याय दिलाने में सहभागी बनने की जरूरत है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः -------/ ऊँ नमः शिवाय।।।

           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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