Friday, April 13, 2018

नारी का सम्मान करो मत इसका अपमान करो

नारी ही शक्तिस्वरूपा दुर्गा भवानी लक्ष्मी सीता राधा जगत जननी तथा घर को स्वर्ग बनाने वाली है और नारी ही घर को नर्क बनाने वाली सूपनखा जैसी दुष्चरित्र करकसा है।एक नारी के पैर घर में पड़ते ही घर स्वर्ग और भगवान का मंदिर बन जाता है तो एक नारी के चरण घर पड़ते ही घर कंगालों जैसा कलहपूर्ण हो जाता है और दरिद्र नारायण का वास होने लगता है। आज भी समाज में दोनों तरह की नारियां मौजूद हैं और दोनों अपना अपना कार्य अपने अपने क्षेत्र में कर रही हैं। वैसे नारी के दोनों स्वरूप संतान उत्पादक संरक्षक व पालक ममत्व से परिपूर्ण के होते है। हमारे यहाँ कहा भी गया है कि पतिब्रता नारी देवी के समान और अनेकों पतियों वाली को वेश्या तुल्य माना गया है।इसी प्रकार एक नारी वाले पुरुष को ब्रह्मचारी तथा बहुनारी वाले दुराचारी कहा जाता है। नारी शक्ति के बिना पुरूष अधूरा होता है और इसीलिए नारी को अर्द्धगिनी कहा जाता है।नारी की शक्ति से ही पुरूष शक्तिमान भक्तवान ईश्वर प्रेमी बनता है और पुरूष नारी शक्ति के बल पर घर से लेकर सृष्टि तक का संचालन संरक्षण करता है।नारी साधारण तुलसी को भगवान भक्त तुलसीदास बना देती है और मनुष्य जीवन को धन्य कर देती है।नारी शक्ति के सामने ब्रह्मा विष्णु महेश को झुकना पड़ता है और माता अनुसूइया अत्रि मुनि और भगवान दत्तात्रेय इसके साक्षात उदाहरण हैं। सभी जानते हैं कि आदिशक्ति जगत जननी से ही ब्रह्मा विष्णु महेश का प्रादुर्भाव हुआ है और वही तीनों की नियन्त्रक हैं। नारी ही सृष्टि की रचियता और सृष्टि विस्तारक है और पालनहार है। नारी शक्ति अपार है और अगर इस शक्ति को नियन्त्रित करने वाला कोई नहीं है तो यहीं शक्ति विनाशक बन जाती है।एक शक्ति अहंकारियों आतताइयों आतंकवादियों के पास होती है तो दूसरी साधु सज्जन पुरुषों के पास होती है फर्क सिर्फ इतना है कि एक नियन्त्रित है तो दूसरी बेलाग है।आज नारी सम्मान सुरक्षा समानता और आजादी को लेकर दुनिया में चर्चा हो रही है और कड़े से कड़े कानून बन रहे है और विशेष सुरक्षा के लिए महिला हेल्पलाइन चलायी जा रही हैं। महिलाओं की सुरक्षा करना पुरुषों का नैतिक दायित्व बनता है और महिलाओं को मर्यादा में रहना भी उनका धर्म बनता है।नारी के शिक्षा ग्रहण करने का मतलब मर्यादामुक्त होना नहीं होता है इसीलिए जब भी नारी मर्यादा लाँघती है तो असुरक्षित और पथभ्रष्ट हो जाती है।नारी शक्ति ही ऐसी मनुष्य के पास अनमोल धरोहर है जिसके कारण उसे देवताओं से ऊपर माना जाता है क्योंकि मनुष्य शरीर के लिए देवता सदा लालायित रहते हैं फिर भी नसीब नहीं होता है। पति के साथ नारी पत्नी रुप में एक सच्चे जीवन साथी एवं सलाहकार  के रुप में होती है और वह पति को परमेश्वर मानकर अपने जीवन को सफल कर लेती है। नारी एक होती है लेकिन उसके स्वरूप अनेकों होते हैं और बहन बेटी बहू पत्नी जैसे रिश्तों में परिवर्तित होती रहती है।
          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार / समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी

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