Sunday, April 22, 2018

पोस्को एक्ट में बदलाव के तहत अब दो महीने में होगी जांच लोगो ने बताया हुई स्वाति के संघर्स की जीत

केंद्रीय कैबिनेट ने 12 साल तक की उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म मामले में कानून को अधिक मजबूत बनाने वाले अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। इस अध्यादेश में फांसी के साथ-साथ बलात्कार के लिए 7 साल की न्यूनतम सजा को बढ़ाकर 10 साल करने का प्रावधान है।इस अध्यादेश में आईपीसी, एविडेंस एक्ट, सीआरपीसी और पॉक्सो एक्ट में संशोधन की बात कही गई है। इस संशोधन के तहत रेप के आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलने का प्रावधान है। इसमें रेप मामलों की जल्द से जल्द जांच और सुनवाई में तेजी का भी प्रावधान है।
केंद्र सरकार का यह कदम कश्मीर के कठुआ में 8 साल की मासूम के गैंगरेप-हत्या और सुरत में 11 साल की बच्ची से रेप की घटनाओं के बाद आया है। इन घटनाओं से पूरा देश गुस्से में है। यह अध्यादेश अब सहमति के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। सरकार ने कहा कि इस अध्यादेश के पीछे उसका मकसद है कि देश की महिलाएं, खासकर छोटी बच्चियां सुरक्षित महसूस करें।अध्यादेश के अनुसार अब महिलाओं से रेप की न्यूनतम सजा 7 साल की जगह 10 साल होगी। 16 साल से कम उम्र की बच्ची से रेप पर 10 की जगह 20 साल या आजीवन कारावास तक दिया जा सकेगा। 16 साल से कम उम्र की बच्ची से गैंगरेप के दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी। 12 साल से कम उम्र की बच्ची से रेप करने वालों को 20 साल या आजीवन कारावास या फांसी की सजा दी जाएगी तथा 12 साल से कम उम्र की बच्ची से गैंगरेप के दोषियों को आजीवन कारावास या मौत की सजा दी जाएगी। इसी प्रकार रेप के हर मामले की जांच व सुनवाई किसी भी हाल में 2 महीने के अंदर पूरी की जाएगी। अपील और अन्य सुनवाई के लिए अधिकतम छह महीने का वक्त दिया जाएगा।इसी तरह 16 साल से कम उम्र की बच्ची से रेप या गैंगरेप के आरोपी के लिए अग्रिम जमानत का कोई प्रावधान नहीं होगा ।

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