Wednesday, April 25, 2018

अलविदा गुड़िया राज बनकर रह गयी मासूम की कहानी

आदर्श दुबे की रिपोर्ट
मासूम गुड़िया को चेतना तिराहा स्थित इंदिरा गांधी प्रतिमा के पास इस्माइल रोटी बैंक के सदस्यों द्धारा मोमबत्तियां जलाकर और हाथों में तख्ती लेकर श्रद्धांजलि दी गई। हाथों में तख्तियां लिए युवाओं के चेहरे पर उदासी और उनके हाथों में जो तख्तियां थी उन पर "गुड़िया का कातिल कौन ?" लिखा हुआ था तो कुछ तख्तियों पर "हम शर्मिंदा हैं गुड़िया" भी लिखा हुआ था।बताते चलें कि विगत 21 अप्रैल की रात में रेलवे स्टेशन के सामने फुटपाथ पर गुड़िया अपने परिवार वालों के साथ सोई थी लेकिन जब उसकी मां की आंख खुली तो गुड़िया वहां नहीं थी काफी खोजबीन करने के बाद सिंचाई विभाग के कार्यालय के पास झाड़ियों में खून से लथपत गुड़िया मिली । कुछ समाजसेवियों की मदद से 22 तारीख को उसे जिला अस्पताल लाया गया जहाँ काफी विलंब के बाद पहुंचे सीओ कैंट ने आवश्यक कार्यवाही पूरी करते हुए मामले की जानकारी ली और इसके बाद गुड़िया को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया जहां 23 तारीख की सुबह में उस मासूम में इस दुनिया को अलविदा कह दिया।गुड़िया का परिवार फुटपाथ पर रहता है, गुड़िया के पिता न तो कोई व्यापारी हैं न डॉक्टर और न ही कोई राजनेता और शायद यही वजह है कि गुड़िया की इस रहस्यमय मौत के बाद भी शहर में रहने वालों पर कोई फर्क नहीं पड़ा । वहीं इस संबंध में स्माइल रोटी बैंक के संचालक आजाद पांडे का कहना है की गुड़िया उनके क्लास में पिछले लगभग 2 वर्षों से आ रही थी और हम उस मासूम को श्रद्धांजलि देने के लिए यहां इकट्ठा हुए हैं।श्रद्धांजलि सभा में प्रियेश मालवीय, प्रणव, डॉ0 कुसुम प्रिया, संजना, शोभनिका, विनय अभिषेक, प्रदीप यादव, अनिल दुबे व दिव्या आदि ने भाग लिया।

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