Friday, April 27, 2018

धार्मिक लबादा ओढ़े कलयुगी भगवान होने का दावा और उनके कुकर्मो का फल

कहावत है कि -" बुरे काम का बुरा नतीजा न मानो तो करके देखो"। इतना ही नहीं कहते हैं कि-" कोई देखे या न देखे मालिक देख रहा है"।इधर धर्म का लबादा ओढ़कर लोगों को ठगने और अंधविश्वास में ढकेलकर उनका आर्थिक मानसिक और शारीरक शोषण करने का जैसे दौर शुरू हो गया है।धर्म के नाम भोलेभाले लोगों की जमात इकठ्ठा करके अपने को भगवान कहलाने की परम्परा शुरू हो गई है।इस समय इस देश में सवा सौ के आसपास ऐसे लोग हैं जो धर्मिक वेशभूषा धारण करके अपने को भगवान कहलवाते हैं।इनमें कुछ अभी बाहर तो कुछ अभी जेल के अंदर हैं तो कुछ जमानत पर हैं।ऐसे लोगों के पास एक संगठित गिरोह रहता है जो इन्हें भगवान मानकर आने वालों को भ्रमित करता रहता है।बाबा राम रहीम ने तो धार्मिक लबादा ओढकर संत फकीर की जगह फिल्मी हीरो बन गये और हीरोइन के साथ खूब मौज उड़ाया और भंडाफोड़ होने के बाद समान्तर सरकार बन गये और उनकी गिरफ्तारी के बाद सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी। अब बाबा राम रहीम जेल में तनहाई की जिन्दगी गुजार रहे हैं।इसी तरह अभी दो दिन पहले देश विदेश में बहुचर्चित आशाराम बापू के दुष्कर्म के मामले में निचली अदालत का फैसला आया है। वह पिछले कई वर्षों से जेल में "हरिओम" कहकर जनता जनार्दन एवं ईश्वर को गुमराह कर रहे थे।उनके ऊपर लोग विश्वास करते थे और उन्हें ईश्वर मानते थे। उन लोगों को झटका तब लगा जब दो हजार तेरह में राजस्थान में एक नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। वैसे बाबा जी आजीवन कारावास की सजा हो जाने के बाद भी अपने को बेगुनाह और सजा को ईश्वर की इच्छा मान रहे हैं।उनके साथ उनके गिरोह में शामिल महिलाओं समेत तीन अन्य को भी बीस बीस साल की सजा सुनाई गई है।उनके दो अन्य सहयोगियों को साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया गया है। इस फैसले के बाद पीड़िता पक्ष के चेहरे पर रौनक आ गयी है और इस फैसले को उचित करार दे रहे हैं तो कुछ लोग अनुचित भी बता रहे हैं।आशाराम बापू को सजा होने के तुरंत बाद राजनीति शुरू हो गई और एक कार्यक्रम के दौरान आशाराम बापू के साथ की वीडियो वायरल करके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला बोल दिया है।यह सही है कि आशाराम बापू की गिनती सजा और आरोप लगने के पहले दुनिया प्रतिष्ठित संत एवं वक्ता के रूप में होती थी और बड़े बड़े लोग उनका दरबार करके हाजिरी लगाकर आशीर्वाद के बहाने राजनैतिक लाभ लेने जाते थे।आशाराम बापू खुद राजनीति के केन्द्र बिन्दु थे क्योंकि उनके पास लाखों श्रद्धावान आस्थावान अनुयायी थे और आज की राजनीति में जिसके पास भीड़ होती है राजनेता उसके गुलाम रहते हैं। लाखों लोगों की भावनाओं को आघात पहुंचाने वाले ऐसे वहशी रंगे सियार को आजीवन कारावास से कम सजा देना न्याय के साथ मजाक जैसा होता। आशाराम बापू के पास दुनिया भर में चार सौ से ज्यादा आश्रम थे जहाँ वह धर्म की आड़ में हैवानियत करते थे और दस हजार करोड़ रुपये के मालिक थे। वह धर्म के नाम पर धन और शारीरक दोनों का शोषण करते थे और लोग उन्हें भगवान मानते थे जबकि उनके शैतान छिपा हुआ था।वह मूलरूप से पाकिस्तान से जुड़े हुये सिंधी समाज के हैं और आजादी के समय वहां से आकर राजस्थान में बस गये थे।उनकी शादी लक्ष्मीदेवी नाम की महिला से हुयी और उनके बच्चे भी हैं। उनका पुत्र भी उनके साथ दुष्कर्म के आरोप में जेल में सड़ रहा है। आशाराम बापू का सफर 1970 के दशक में साबरमती नदी के किनारे एक झोपड़ी से हुआ था और वह अपने को हिमालय पर रहने वाले संतशिरोमणि लीलाशाह बापू के शिष्य बताते थे। आशाराम बापू के जीवन पर डाकूमेंटरी भी बनी हैं जिनमें इन्हें एक महान संत बताया गया है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।
          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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