Monday, April 30, 2018

आग का प्रलयकारी स्वरूप और उसे नियंत्रित करने वाली फायर ब्रिगेड पर विशेष

आग मनुष्य जीवन की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता होती है और बिना आग के जीवन अधूरा रहते है। आग कुदरत की दी हुयी एक अनमोल नियामत होती है। आग मनुष्य के अंदर और बाहर दोनों जगहों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मनुष्य जीवन में आग पैदा होने के बाद से मरने के बाद तक अपनी भूमिका अदा करती है।आग को महाशक्ति और ईश्वर का स्वरूप भी माना जाता है। आग जबतक नियन्त्रण में रहती है तबतक उपयोगी है लेकिन जब अनियंत्रित होती है तो विनाशक बनकर तांडव नृत्य करने लगती है। आग कच्चा पक्का मकान दूकान खेत खलिहान नहीं देखती है और वह अपने स्वाभाव वश सबकुछ जलाकर खाक कर देती है। आग बहुमंजिला भवनों संस्थानों प्रतिष्ठानों को ही नही खेत खलिहान को भी जलाकर नष्ट कर देती है और देखते ही देखते राजा से भिखमंगा बना देती हैं। गर्मी के दिनों में आग का प्रकोप बढ़ जाता है और एक नन्हीं सी चिनगारी की चपेट में आते ही प्रचंड रुप धारण कर लेती है। ग्रामीण क्षेत्रों में हर साल आग लगने से हजारों घर हजारों बीघा जमीन पर लगी किसान की गाढ़ी कमाई की फसल घर छप्पर सबकुछ रोटी कपड़ा और मकान की समस्या पैदा कर देती है।आग लगने तमाम लोगों और तमाम मवेशियों एवं जीवजंतुओं की जान भी चली जाती है। आग के प्रकोप से जनमानस को बचाने के लिए सरकार ने आग बुझाने वाला पुलिस वर्दीधारी विभाग ही बना रखा है जो आग से घिरे फंसे लोगों के लिए देवदूत बनकर जान बचा लेते हैं।फायर ब्रिगेड की सेवाएं महानगरों की बहुमंजिला इमारतों में ही नहीं घर गाँव खेत खलिहान में भी सराहनीय एवं उल्लेखनीय योगदान देती है। आग के खिलाड़ी फायर कर्मियों का लाभ तभी मिल सकता है जब उनके पास फायर वाहन चालक पाइप आदि मौजूद हो।कहते हैं कि जिस तरह बिना हथियार बड़े से बड़ा बहादुर भी कुछ नहीं कर सकता है उसी तरह बिना संसाधन के फायर बिग्रेड का कोई मतलब नहीं होता है। सरकार फायर ब्रिगेड सर्विस को आधुनिकता प्रदान करने के लिए आधुनिक तकनीक के संसाधनों की व्यवस्था करती रहती है इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में फायर सेवाएं रामभरोसे चल रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बाबा आदम के जमाने के फायर वाहन पंप और पाइप हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों में तबाही और बरबादी का सबब बन रहे हैं।फायर स्टेशन से निकली गाड़ियां समय से मौके तक नहीं पहुंच पाती हैं और खेत खलिहान गाँव जलकर राख हो जाता है।ताज्जुब इस बात का है कि मौजूद फायर गाड़ियों का फायदा इन्हें चलाने वाले चालकों की कमी के चलते जनमानस को नहीं मिल पाता है।प्रशिक्षित फायर कर्मियों की कमी को अप्रशिक्षित होमगार्ड के जवानों से पूरी की जा रही है।इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमारे फायर ब्रिगेड के लोग जिस तरह संसाधनों की कमी होते हुए भी जान खतरे में डालकर जनमानस को आग विभीषिका से बचाते हैं उसके उनकी जितनी प्रंशसा सराहना की जाय उतनी कम है। फायर बिग्रेड के कर्मचारियों को हम उनके साहसिक कार्य के लिए धन्यवाद एवं शुभकामनाएं देते हैं और सरकार से अनुरोध करते हैं कि फायर ब्रिगेड स्टेशनों पर पुरानी गाड़ियों की जगह नयी गाड़ियां और फायर कर्मियों व संसाधनों की कमी को जनहित में पूरा करे क्योंकि जब आग बेदर्द बन जाती है तो अमीर गरीब नहीं देखती है और सबको एक जैसा बना देती है।धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः -------/ ऊँ नमः शिवाय।।।

          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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