Sunday, April 29, 2018

वरिष्ठ पत्रकार भोला नाथ मिश्रा का लेख सड़क दुर्घटनाओं पर विशेष

आधुनिक तकनीक की सड़कें वाहन एवं दुर्घटनाओं में घायलों क लियेे ट्रामा सेंटर सुविधा और सरकार के ऐतिहासिक निर्णय  ज्यौं-जयौं देश विकास करके आधुनिक तकनीक से जुड़कर कम्प्यूटर दुनिया में प्रवेश कर रहा है त्यौ त्यौ आबादी के साथ उसके यातायात के लिए मार्ग राजमार्ग भी बढ़ते जा रहे हैं। आधुनिक तकनीक से दो लेन चारलेन छः लेन सड़कों के बन जाने के साथ आधुनिक टेक्नालॉजी के हाई स्पीड वाले वाहन भी बढ़ गये हैं। आधुनिक तकनीक से बनी सड़कें और वाहन इस समय मार्गों राजमार्गों पर मौत का ताडंव मचाने में सहायक बन रहे हैं। इस समय रोजाना होने वाली मार्ग दुर्घटनाओं में सैंकड़ों मौतें हो रही हैं और हजारों लोग गंभीर रूप से घायल होकर मरणासन्न बन जाते हैं। दुर्घटनाओं में घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध न हो पाने से तमाम लोगों की मौत ट्रामा सेंटर पहुंचते पहुंचते हो जाती है क्योंकि घटनास्थल से ट्रामा सेंटर तक पहुंचने में घंटों लग जाते हैं। आपको याद होगा हमने पिछले महीनों अपनी सुप्रभात सम्पादकीय के माध्यम से इस महत्वपूर्ण ज्वलंत समस्या पर चर्चा करते हुए राजमार्गों के किनारे स्थित सीएचसियों को मिनी ट्रामा सेंटर के रूप परिवर्तित करने का अनुरोध सरकार से किया था ताकि मौके पर न मरने वालों की जान तत्काल ट्रामा सेंटर की सुविधाएं उपलब्ध कराकर बचाई जा सके। हम खुशी है कि धर्म तंत्र के साथ राजतंत्र का समन्वय स्थापित करके सरकार चला रहे मुख्यमंत्री योगीजी ने इस दिशा में दो दिन पहले सराहनीय स्वागत योग्य जनहित में पहल की है। सरकार ने मुख्य मार्गों से जुड़ी सीएचसियों की सूरत और सीरत बदलने जा रही है। प्रदेश की आठ सौ इक्कीस सीएचसियों में विभिन्न मार्गों के किनारे वाली दो सौ अस्सी ऐसी हैं जिनके काया कल्प करने का अभूतपूर्व फैसला लिया गया है।सरकार तीन एकड़ भूमि वाली सौ सीएचसियों पर खाली पड़ी जमीनों का उपयोग करके वहाँ सौ बिस्तरों तथा सौ से अधिक सीएचसियों पर ट्रामा केयर की इमरजेंसी यूनिट स्थापित करेगी।डेढ़ सौ सीएचसियों पर सौ बेडों वाले अस्पताल का बनना स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक अगले नवम्बर से शुरू हो जायेगा।दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि सीएचसियों के भवन तोड़कर इन सौ बेडो वाले अस्पतालों का निर्माण किया जायेगा।सरकार के इस फैसले से सरकार को ही राजकोषीय नुकसान होगा। बेहतर तो यह होता कि सीएचसियों के भवनों का उपयोग कर लिया जाता जिससे सरकारी कोष बहुत पर भार न पड़ता। सरकार ने सभी मंडल मुख्यालयों पर ट्रामा सेंटर बनाने का फैसला किया है।सभी सीएचसियों पर दुर्घटना के घायलों का इलाज इन ट्रामा केयर यूनिटों पर प्राथमिक उपचार के रूप में किया जायेगा।गंभीर होने पर उन्हें मंडल मुख्यालय पर बने ट्रामा सेंटर पर तत्काल एम्बुलेंस से भेज दिया जायेगा और जरूरत पड़ने पर एअर एम्बुलेंस की भी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार ने इस दिशा में जितने निर्णय लिया है उन सभी निर्णयों को मूर्ति रुप कब मिलता है इसका जबाब भविष्य के गर्भ में छिपा है।यह सही है कि जितने निर्णय सरकार ने स्वास्थ्य चिकित्सा के अमूलचूक परिवर्तन के हित में लिये हैं वह सभी जिस समय मूर्ति रुप ले लेगें उस स्वास्थ्य चिकित्सा के नये युग का शुभारंभ हो जायेगा।अभी तो सरकार की घोषणा कोरी कल्पना में गोते लगाया जा सकता है।अरबों खरबों लागत की इन योजनाओं को साकार होने में लम्बा समय लग जायेगा जबकि जरूरत तत्काल सुविधा की है।जरूरत सीएचसियों के आधुनिकीकरण करके ब्लैड बैंक एवं जांच यूनिट स्थापित करने की है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः -------/ ऊँ नमः शिवाय।।।

          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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