Wednesday, April 4, 2018

जनरेटिक दवाये और उपकरण पर विशेष रिपोर्ट

जिस तरह से इंजन खराब होने पर मिस्त्री और कलपुर्जों की आवश्यकता पड़ती है बिल्कुल उसी तरह मनुष्य को अपने शरीर रुपी इंजन के लिए चिकित्सक और दवाओं की जरूरत होती है।जल्दी ऐसा मनुष्य नहीं मिलेगा जिसे चिकित्सक और दवाओं की आवश्यकता जीवन में न पड़ती है। चिकित्सक और दवाएं मनुष्य जीवन से जुड़े होते हैं और हर मनुष्य को किसी न किसी रुप में इन दोनों की जरूरत जरूर पड़ती है।आज के दौर में हर आदमी किसी न किसी छोटे बड़े रोग से परेशान रहता है और उसे दवाओं की जरूरत पड़ती है।इधर दवाओं के नाम इस कदर लूट हो रही है कि हर आदमी इन्हें खरीद नहीं पाता है और दवा के अभाव में एक दिन उसकी असमायिक मौत हो जाती है।दवाओं के नाम जो गोरखधंधा चल रहा है उससे सभी वाकिफ हैं।दो रूपये की दवा बीस रुपये में मिलती है और दवा पर बाकायदा बीस रूपये लिखे होते हैं। यहीं हाल सर्जिकल उपकरणों का है और इनके मनमाने मूल्य लिये जा रहे हैं। दवाओं और उपकरणों के मूल्यों में बेतहाशा वृद्धि गरीबों को बेमौत मरने पर मजबूर कर रही है।चिकित्सकों और दवा बनाने वाली कम्पनियों का गठजोड़ एवं कमीशनखोरी मरीजों की लूट का कारण बना हुआ है।चाहे सरकारी अस्पताल हो चाहे प्राइवेट हो हर जगह बाहर से दवा लिखने का रिवाज सा हो गया है और लोग पैसे के अभाव में समुचित इलाज नहीं करा पाते हैं।आपको शायद याद हो कि हमने अरसा एक साल पहले इस मुद्दे को हमने अपनी दैनिक सुप्रभात सम्पादकीय में उठाते हुए राजस्थान में लागू जनरेटिक प्रणाली का विस्तार उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में लागू करने का अनुरोध सरकार से किया था और जगह जगह जनरेटिक दवाओं की दूकान खोलने का सुझाव दिया था। हमें खुशी है कि केन्द्र सरकार ने हमारे सुझाव पर गौर किया था और पूरे देश में जनरेटिक दवाओं की दूकान खोलने का फैसला प्रधानमंत्री जन औषधि के रूप में किया गया था और विभिन्न राज्यों में दूकानें भी वर्ष 2016 में ही खुल गयी थी। उत्तर प्रदेश में यह योजना मामला हाईकोर्ट पहुंच जाने के कारण अधर में लटक गयी थी और सीएचसी, पीएचसी,जिला पुरूष एवं महिला अस्पतालों में जनरेटिक दवाओं की दूकानें नहीं खुल सकी थी। इस योजना के खिलाफ हाई कोर्ट जाने वाले फार्मासिस्टों को अदालत ने से झटका और सरकार को हरी झंडी मिल गयी है। इसके लिए उच्च न्यायालय बधाई का पात्र है और इससे निश्चित तौर पर गरीब दवाओं के अभाव में बमौत नही मरने पायेगें। जनरेटिक दवाओं के खुलने के बाद छः सौ तरह की दवाओं और सर्जिकल उपकरणों के मूल्य अस्सी फीसदी तक कम हो जायेंगे जो देश प्रदेश के गरीबों के लिए नया जीवन मिलने से कम नही है।न्यायालय के इस आदेश के बाद जनरेटिक दवाओं की दूकानों को खोलने का रास्ता 28 मार्च से साफ हो गया है। जनरेटिक योजना के स्टेट नोडल आफीसर डाक्टर एके सिंह के अनुसार न्यायालय ने जनहित के मद्देनजर सरकार के पक्ष में यह फैसला सुनाया है।उन्होंने बताया है कि पहले प्रदेश की 823 सीएचसियों, 200 जिला व महिला अस्पतालों और 16 मेडिकल कालेजों में जनरेटिक दवाओं की दूकानें खोलने की योजना बनाई गई है।योजना के पहले चरण में एक हजार केन्द्रों पर डेढ़ माह के अंदर जनरेटिक दूकानें खोली जायेगी।इन केन्द्रों पर छः सौ प्रकार की दवाएं और एक सौ चौवन तरह के सर्जिकल उपकरण आदि उपलब्ध रहेगें।इन जनरेटिक दवा स्टोरों को खोलने के लिए विक्रेताओं और स्थान का चयन हो चुका है।भविष्य में इसका विस्तार ब्लाक और ग्रामीण स्तर तक करने की योजना है ताकि इस योजना का लाभ सबसे नीचे पायदान वाले गाँव गरीबों तक को मिल सके।उच्च न्यायालय के आदेश आने के बाद इस दिशा में तेजी से की जा रही कार्यवाही के लिए सरकार भी बधाई की पात्र है। सरकार के इस कदम से अमीर गरीब सभी वर्गों को लाभ मिलेगा और आशा है कि यह योजना आमजन के लिए वरदान साबित होगी।धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः --------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
         भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार /समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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