Friday, May 11, 2018

गोंडा जनपद की यह व्यवस्था सुधरने की जगह और बिगड़ी

गोंडा ब्यूरो पवन कुमार द्विवेदी         गोंडा जनपद की शिक्षा व्यवस्था चाहे वेसिक शिक्षा हो ,माद्यमिक या उच्च शिक्षा हो दिनों दिन उनका स्तर गिरता जा रहा है ।इसके लिए जिम्मेदार कौन है ये आप लोग तय करे ।वर्तमान परदृस्य में अब शिक्षक को केवल अपने वेतन व अन्य सुविधाओ से मतलब न कि शिक्षा व्यवस्था में निरंतर नए आयामो को जोड़ना तो जैसे यहाँ के शिक्षक जानते ही नही ,जब शिक्षक ऐसे है तो छात्रो का मिजाज भी उसी तरह होता जा रहा है वो भी केवल पास होने व अच्छे मार्क्स लाने के जुगाड़ में रहते है ।आज हम बेसिक शिक्षा पर फोकस कर रहे है ,एक तरफ सरकार देश के प्रत्येक बच्चे के लिए शिक्षा को अनिवार्य बना रखा है बेसिक स्कूलों में बच्चो की संख्या बढ़ाने के लिए वो सब सुविधाएं दे रही है ।वो सुविधाएं बच्चो तक न पहुँच कर भरस्टाचार की भेंट चढ़ जा रही है ।इसका जिम्मेदार कौन है ये पाठक तय करे मेरी नजर में पूरा सिस्टम ही भरस्टाचार के आकंठ में डूबा हुआ है ।एक तरफ जहाँ प्राइवेट विद्यालयो में शिक्षको को वेतन कम मिलता है उसके बात बी शिक्षक जी जान लगाकर पढ़ाता है ,वही बेसिक शिक्षक को वेतन के साथ अन्य सुविधाएं भी मिलती है उसके बाद भी वहाँ बच्चों की संख्या दिनोदिन घटती जा रही है इसका साफ कारण है शिक्षको की शिक्षा के प्रति उदासीनता साफ झलक रही है ,इस बारे मे कई विद्यालयो की हकीकत जानने का प्रयास किया गया तो तथ्य सामने आए है उसे देखकर यही लगता है कि सरकार  का अभियान सर्वशिक्षा  बिल्कुल फेल नजर आ रहा है ,वही एक बात और सामने आई है कि कोर्ट ने जबसे शिक्षा मित्रो को उनके मूल स्कूलों में भेजा है तबसे शिक्षा का स्तर और अधिक गिर गई है ,क्योकि वे अधिकतर स्कूल जाते नही है उन्ही का देखी देखा अध्यापक भी स्कूल आने में लापरवाही कर रहे है ।जिसका खामियाजा पूरे अभियान को झेलना पड़ रहा है ।कुछ स्कूलो में ये आलम है कि वहाँ बच्चे न के बराबर है वही कागजो में बच्चो की संख्या अधिक दिखाकर स्कूल का संचालन शिक्षक व अधिकारियो की मिली भगत से सरकार को गलत जानकारी देकर पैसे का बंदर बाट किया जा रहा है ।शिक्षक व अधिकारियो को केवल अपना फायदा नजर आता है ।उनके अंदर नैतिकता का अभाव हो गया ,पहले लोग गुरु को भगवान का दर्जा देते है लेकिन अब शिक्षक की नौकरी सबसे मौज की नौकरी मानी जाती है ।अधिकतर युवा अब शिक्षक की नौकरी के लिए लालायित रहते है ।ये शिक्षक गुरु घंटाल बन गए है ।अब ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि शिक्षा के गिरते स्तर गिराने वालो पर शिकंजा कस पाएगी ,ऐसे स्कूलों को बंद कर पायेगी जिनमे बच्चे न के बराबर है ।ऐसे शिक्षक व अधिकारियों पर कार्यवाही कर पायेगी

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