Saturday, May 5, 2018

लोकतंत्र में जातिगत राजनीति के तहत दलितो के घर भोजन का चलन

लोकतंत्र की स्थापना करते समय शायद यह किसी ने  सोचा भी न होगा कि लोकतांत्रिक प्रणाली में राजनीति सेवाभाव से दूर होकर जाति पांत धर्म वर्ग सम्प्रदाय में सिमटकर रह जायेगी। राजनीति सर्वहारा समाज के सर्वागीण हितों की रक्षा एवं सर्वांगीण विकास के लिए होती है और राजनीति एक दो नहीं बल्कि समस्त समाज के लिए कार्य करती है। इधर राजनीति का मतलब ऐनकेन प्रकारेण वोट हथियाना हो गया है और राजनीति की परिभाषा बदल गयी है। आजकल राजनीति अगड़े पिछड़े दलितों के साथ ही हिन्दू मुस्लिम में विभाजित हो गई है जिसके फलस्वरूप समाज में विघटन आपसी वैमनस्यता प्रभावित हुयी है और हमारे समाज की समाजिक कौमी एकता पर विपरीत प्रभाव पड़ा है।इस तुष्टीकृत राजनीति के कारण ही आज समाज में जातीय हिंसा और अराजकता फैलने लगी है। दलित मुस्लिम राजनीति के रसगुल्ला बन गए हैं जिन्हें कोई अपने से दूर नहीं रखना चाहते हैं। दलित मुस्लिम राजनीति का एक नमूना अभी दो दिन पहले अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में लगी जिन्ना की फोटो को लेकर देखने को मिला और उस फोटो पर राजनीति शुरू हो गई। दलितों के भूतपूर्व नेता स्वामी प्रसाद मौर्या इस विवाद में पड़कर अपनी वर्तमान भाजपा के लिए सिरदर्द बन गए हैं।इससे पहले भी मौर्या जी रायबरेली में गत माह हुयी नृशंस घटना में भी आलोचना के शिकार बन चुके हैं। भाजपा ने मौर्या जी दलित प्रेम बढ़ाने के चक्कर में उन्हें शामिल करके कैबिनेट मंत्री बनाया है।इस समय भाजपा अपना इतिहास भूगोल बदलकर नया इतिहास भूगोल तैयार करने में जुटी है और इसके लिए उसने अपना महाअभियान शुरू कर दिया है। इस समय इसी दलित अभियान के तहत भाजपा गाँव रात्रि निवास करके दलितों के साथ उनके घर पर भोजन कर राम और सेवरी की याद ताजा कर रही है।भगवान राम क्षत्रिय थे जबकि सेबरी दलित समाज से जुड़ी थी किन्तु भगवान ने उसके झूठें बैर खा लिये थे। भाजपा के दलितों के घर पर भोजन करने के अभियान से दलितों के तथाकथित नेताओं की नींद हराम हो गयी है लेकिन भाजपा के ही कुछ वरिष्ठ दलित नेता इस अभियान की हवा निकालने में जुट गये हैं और खुलकर आलोचना भी करने लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट के एसी एसटी एक्ट के निर्णय को लेकर देश की सभी राजनीतिक पार्टियां एकमत होकर सुप्रीम कोर्ट पर हमलावर हो गयी हैं जिससे गैर दलित समाज हक्का बक्का रह गया है। इस समय भाजपा का दलित के साथ भोजन करने का अभियान राजनैतिक क्षेत्रों में में चर्चा का विषय बना हुआ है।तरह तरह की चर्चाएं भी होने लगी हैं और कहा जा रहा है कि भोजन अलग से मंगाकर दलितों के साथ बैठकर उनके दरवाजे पर सिर्फ खाया जाता है। भाजपा सबका साथ सबका विकास करके सर्वहारा समाज की पार्टी बनने की राह पर लगता है कि चल रही है और चलना भी चाहिए क्योंकि दलितों ने उनके ऊपर विश्वास जताते हुए लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अपनों को नजरदांज करके साथ दिया है। इसके पहले भाजपा को सर्वणों की मनुवादी पार्टी कहा जाता था लेकिन आजकल पार्टी अपने नये इतिहास में पूरे समाज पर अपना आधिपत्य कायम करने में जुटी हुई है। लोकसभा चुनाव के सन्निकट होने के कारण सभी विपक्षी दलों खासतौर पर दलितों एवं मुस्लिमों के नाम पर राजनीति करने वाले भाजपा के इस अभियान से भौंचक्के है। धन्यवाद ।। भूलचूक गलती माफ।।सुप्रभात /वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः --------/ ऊँ नमः शिवाय।।।

          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/ समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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