Thursday, May 3, 2018

राजनीति में भाषण पर छिड़ी जंग पर विशेष लेख भोला नाथ मिश्रा की कलम से

मनुष्य की जुबान से निकलने वाली भाषा उसके दिलों दिमाग से जुड़ी होती है। राजनीति में तो एक समय वह भी था कि लोग राजनेताओं का दिली उदगार सुनकर उनकी भविष्य की नीति एवं नियत का अंदाज लगाते थे। इधर बदलते समय में भाषण भी मार्डनाइज वक्ती हो गये हैं और जुबान से दिली उदगार नहीं बल्कि बनावटी उदगार निकालकर राजनैतिक उल्लू सीधा करने का दौर शुरू हो गया है। राजनीति में राजनेताओं के भाषण उनकी एक पहचान होतीे हैं और लच्छेदार भाषण एवं झूठी कसमें खाकर भोले भाले लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। राजनीति में राजनेता जब अपने दिल से नहीं बल्कि दूसरे का लिखा हुआ भाषण पढ़कर बोलता है तो वह उसके दिली विचार नही रह जाता हैं क्योंकि हृदय से निकलने वाले भाषणों की अपनी भाषा शैली एवं हावभाव होते हैं। वैसे पहले से लिखे हुए भाषण को मंच पर पढ़ने की परम्परा बहुत पहले से चल रही है और हमारे तमाम राजनेता ऐसे रहे और आज भी है जो दूसरे का लिखा भाषण अपने दिली उदगार के रुप देते हैं। इधर कर्नाटक में होने जा रहे विधानसभा चुनावों के दौरान इसी भाषण के मुद्दे को ढाल बनाकर भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी सीधे अपने निकटतम मुख्य प्रतिपक्षी कांग्रेस पर हमला बोल रहे हैं। इस मुद्दे के सामने अन्य मुद्दे पीछे नेपथ्य में चले गये हैं और लगता है कि इसी मुद्दे के सहारे चुनावी वैतरणी पार लगा ली जायेगी। इधर पिछले कुछ समय से काग्रेंस अगुवा राहुल गांधी जी लगातार भाजपा व सरकार की कार्यशैली पर जुबानी हमलों की बौछार किये हुये हैं तथा मुख्य विपक्षी की भूमिका निभा रहे हैं। भाजपा भी उन्हें मुंहतोड़ जवाब देने में पीछे नहीं है और एक से एक व्यंग्य बाण छोड़कर बचाव में जुटी है तथा दिल्ली से अमेठी तक घेराबंदी कर रही है। इधर प्रधानमंत्री ने एक और हमला काग्रेंस प्रमुख पर राजनैतिक हमला बोला है जिसका जबाब तलाशने में कांग्रेस को समय लग रहा है।यह सही है कि राहुल गांधी जी लिखा भाषण देते हैं और उस भाषण में उनके दिली उदगार होते हैं लेकिन राजनीति ऐसी होती है कि लिखे भाषण की जगह अपने मन से भाषण देने को आज चुनावी मुद्दा बना दिया गया है।राजनीति में समस्याओं एवं उनके निदान की भावी योजनाओं की चर्चा की जाती है लेकिन वर्तमान राजनीति वसूलों सिद्धांतों पर नही बल्कि व्यक्तिगत दोषारोपण करके की जा रही है जो लोकतंत्र के भविष्य के हित में नही है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः ----------/ ऊँ नमः स्वाहा।।।
           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।।

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