Tuesday, May 8, 2018

सीतापुर के खैराबाद में आदमखोर कुत्तों का आतंक

जंगली जानवरों में अधिकांश हिंसक होते हैं क्योंकि उनके सामने पेट भरने का कोई दूसरा विकल्प नहीं होता है। यह जंगली हिंसक जानवर जंगल में रहने वाले अपने से छोटे गैर बिरादरी को ही अपना शिकार बनाते हैं। कभी कभी यहीं हिंसक जानवर जब भटककर या भूख से तिलमिला कर जंगल से आबादी में आ जाते हैं तो पालतू पशुओं के साथ आदमी को भी नहीं छोड़ते हैं। ज्यौं ज्यौं जंगल कम होते जा रहे हैं त्यौं त्यों जंगली जानवरों का आतंक बढ़ता जा रहा है और यह आदमखोर होते जा रहे हैं। जब यह जंगली हिंसक जानवर शेर चीता भेड़िया सूअर आदि आदमखोर हो जाते हैं तो  इन्हें पहले जिंदा कैद करने का प्रयास किया जाता है और अगर सफलता नहीं मिलती है तो बेझिझक इन्हें गोली मार दी जाती है। यही हाल गाँव देहात शहर एवं गलियों में घूमने वाले पागल कुत्तों का होता है और लोग घेरकर मार डालते हैं क्योंकि उनके काटने से जान का खतरा पैदा हो जाता है। अबतक जंगली सूअर शेर भालू चीता भेड़िया ही आदमखोर होते थे लेकिन अब तो गाँव गली के आवारा कुत्ते भी हिंसक आदमखोर हो गये हैं। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के खैराबाद क्षेत्र में इधर अचानक कुत्ते आदमखोर बनकर तबाही मचाये हुये है और अबतक तमाम बच्चे घायल नहीं हो चुके हैं बल्कि सरकारी आँकड़ों के मुताबिक एक दर्जन बच्चों की मौत भी हो चुकी है।  आदमखोर कुत्तों का आतंक आज भी जारी है और कोई कुछ कर नहीं पा रहा है। समस्या तहसील जिला स्तरीय नहीं बल्कि प्रदेश स्तर पर पहुंच गई और जिले की प्रभारी मंत्री रीता बहुगुणा जोशी जिले का दौरा परसों कर चुकी हैं और मुख्यमंत्री योगीजी खुद ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से कुत्तों से हो रही घटनाओं को रोकने के निर्देश तथा मृतकों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की है।इसके बाद बच्चों पर हमला कर रहे आदमखोर कुत्तों को पकड़ने की शुरुआत हो सकी है। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप और प्रभारी मंत्री के कड़े रुख के बाद वहाँ के सीओ सिटी ने ड्रोन लगाकर पूरे थाना क्षेत्र की निगरानी किया है।इसके बाद वहाँ के जिलाधिकारी ने आधा दर्जन जगहों पर ड्रोन कैमरे लगाकर उनकी देखरेख के लिये उपजिलाधिकारियों की ड्यूटी लगा दी गयी है और लखनऊ  नगर निगम की कुत्तों को पकड़ने वाली टीम भी पहुंच गई। लेकिन अबतक कोई सफलता हाथ नहीं लगी है।सवाल इस बात का है कि क्या ड्रोन कैमरों को लगाने से समस्या का समाधान हो जायेगा?कितने देर और कितने समय तक उपजिलाधिकारी अपने सारे कार्य छोड़कर इन कैमरों की निगरानी करेंगे?ड्रोन कैमरों में अगर कुत्ते दिखाई भी पड़ते हैं तो जरूरी नहीं है कि जबतक वहां लोग वहाँ तक पकड़ने पहुंचे तबतक वह वहाँ पर मौजूद रहकर आने का इंतजार करे।इन्हें काम्बिंग करके पकड़ा या मारा जा सकता है।ग्रामीणों को इस अभियान में शामिल किया जा सकता है क्योंकि ग्रामीण अपनी औकात में आ जाते हैं तो घेरकर शेर चीता और भेड़िए को मार डालते है।इसी तरह पागल कुत्तों को तलाश करके मार डालते हैं।कुत्ते कहीं गायब नही हो गये है बल्कि बेखौफ होकर लगातार बच्चों को शिकार बनाते जा रहे हैं। बेगुनाह मासूम बच्चों की जान के घातक बने कुत्तों को पकड़ने में देरी घटनाओं में वृद्धि कर रहा है और क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया है इसलिए इन दहशगर्दो के साथ रियायत करना नौनिहालों के साथ अन्याय होगा। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः --------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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