Friday, May 25, 2018

राजनीतिक संकट काल मे जरूरी होते है राजनीतिक समझौते

कहते हैं कि मुसीबत के समय जिस तरह बाघ एवं बकरी एक घाट पर पानी लगते हैं और बाढ़ के समय एक ही नाव से आदमी और साँप दोनों एक साथ जान बचाते हैं। उसी तरह राजनीति में जब बुरे दिन आते हैं तो सभी अपने मूल विचारों एवं सिद्धान्तों को भूलकर एक दूसरे को भला बुरा कहने की जगह एक राय होकर एक साथ एक लक्ष्य को लेकर एक मंच पर आ जाते हैं। इमरजेंसी के जमाने से लेकर अबतक वक्ती राजनैतिक समझौते सत्ता हासिल करने के लिए समय समय पर होते रहे हैं। वक्ती राजनैतिक समझौते केन्द्र एवं राज्य दोनों स्तरों पर होते हैं और जब बुरा वक्त समाप्त हो जाता है तो अपनी ढफली अपना राग अलापने लगते हैं।कहावत है कि जिस तरह मौका पड़ने पर गधे को बाप बनाना पड़ता है उसी तरह सकंट के समय राजनीति में दुश्मन को भी गले लगाना पड़ता है। राजनीति में यह वक्ती समझौता आगे चलकर सत्ता में आने पर कभी कभी गले की हड्डी बन जाता है और लम्बे समय तक टिकाऊ नहीं रह पाता है।इस समय भाजपाई लहर ने प्रतिपक्षी राजनैतिक दलों की हालत पतली कर रखी है और विपक्षी असहाय सा महसूस करके राष्ट्रपति तक से बचाव की गुहार लगा रहे है। कर्नाटक में अभी हाल में मतगणना होने तक सभी दल एक दूसरे को कोस रहे थे और समझौते से कोसों दूर थे लेकिन मतगणना के बाद भाजपा को मिली सफलता को देख सभी विपक्षी एक साथ एक मंच पर आ गये।वहाँ पर नये मुख्यमंत्री के शपथग्रहण के समय विपक्षी एकजुटता का जो प्रदर्शन देखने को मिला वह अपने आप में बेमिसाल सा है। जिस अंदाज में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी जी बसपा प्रमुख से मिली उसे देखकर लगता है कि जैसे दोनों में जन्म जन्म का साथ रहा हो। कर्नाटक में शपथग्रहण के नाम पर प्रदर्शित विपक्षी एकता भावी लोकसभा चुनाव को प्रभावित कर सत्तारूढ़ भाजपा की दुश्वारियां बढ़ा सकती है। इमरजेंसी में इसी तरह कांग्रेस को सत्ताच्युत करने के सभी विपक्षी दलों ने जनता पार्टी बना ली थी जिसमें भाजपा भी शामिल थी। सत्ता के लिए होने वाले समझौते पानी के बुलबुले की तरह होते हैं और इनका कोई वजूद नहीं होता है।भाजपा भी समझौते के साथ सरकार चला रही है लेकिन संख्या सबसे ज्यादा होने के कारण सहयोगी बहुत मुखरित नहीं हो पा रहे हैं। राजनीति में इस तरह के समझौता का लाभ सिर्फ राजनैतिक दलों को मिलता है आम नागरिकों को नहीं मिल पाता है और एक साथ रहते हुए भी सभी दल अपने वर्चस्व को मजबूत करने में जुटे रहते हैं। राष्ट्रीय स्तर के राजनैतिक दलों का आपस में समझौता तो राष्ट्रीय सोच का हो सकता है लेकिन राष्ट्रीय दलों के साथ क्षेत्रीय राजनैतिक दलों के समावेश होने से विचारों सिद्धान्तों एवं नीतियों में समानता नहीं रह पाती है। कर्नाटक में प्रदर्शित विपक्षी एकता राजनैतिक परिदृश्य में परिवर्तन लाने में सहायक हो सकती है लेकिन समय रहते इसका पर्दाफाश हो जाने से सत्तारूढ़ सरकार को संभलने का अवसर भी मिल गया है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः -------/ ऊँ नमः शिवाय।।।

          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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