Thursday, May 10, 2018

पूर्व मुख्यमंत्रियों को जीवन भर आवास सुविधा और सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले लार विशेष

लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधि का विशेष महत्व होता है और उन्हें विशेष दर्जा दिया जाता है।लोकतंत्र में यह माना जाता है कि वह लाखों लोगों का चुना हुआ जनता जनार्दन का नुमाइंदा है इसलिए उसको विशेष सम्मान और प्रोटोकाल का अधिकार दिया जाता है।उसके रहने खाने यात्रा करने के साथ ही उसे क्षेत्र में जनता के बीच जाकर उनसे मिलने के लिये साधन और विशेष भत्ता दिया जाता है।इन जन प्रतिनिधियों में से एक उनका सर्वमान्य अगुवा होता है जिसे नेता माना जाता है।यही नेता विधानसभा विधान परिषद और लोकसभा राज्यसभा में पार्टी का नेतृत्व करता है।यह जनप्रतिनिधि और उनके नेता विभिन्न दलों से जुड़े होते हैं और जिस दल के जनप्रतिनिधियों की संख्या सबसे ज्यादा होती है उसके दल के अगुवा यानी नेता को सरकार गठित करने का अवसर मिलता है। जनप्रतिनिधियों द्वारा चुना नेता ही सरकार बनने की स्थिति में मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री बनाया जाता है। सरकार बनने के बाद सरकार में शामिल जनप्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री व मंत्री मानकर उन्हें सारी संविधान प्रदत्त सुविधाएं मुहैया कराई जाती है और विशेष प्रोटोकाल दिया जाता है। जनप्रतिनिधियों एवं उनके मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को यह सारी सुविधाएं सिर्फ तभी तक मिलती हैं जबतक वह निर्वाचित प्रतिनिधि रहते हैं। निर्वाचन कार्यकाल समाप्त होते ही वह सामान्य नागरिक के रूप में हो जाता है।इसके बावजूद अधिकांश मंत्री मुख्यमंत्री  सरकारी निवास नही छोड़ते हैं और सुविधा का लाभ लेते रहते हैं। परिणाम यह होता है कि हर बार नये मुख्यमंत्री के आवास के निर्माण के लिये सरकारी खजाने को खाली करना पड़ता है।इन सरकारी आवासों में ताजिन्दगी बने रहने के लिए पिछले वर्षों नियमावली में संशोधन करके नया नियम बनाया जा चुका है। उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों की लम्बी लाइन है और सभी अपने अपने कार्यकाल के आवासों पर कब्जा जमाये बैठे हैं। जो इस दुनिया में नहीं रह गये हैं  उनकी अगली पीढ़ी वरासतन उसमें अपने परिवार के साथ रह रही है। अभी दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने इस सम्बंध में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उत्तर प्रदेश के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को औकात में लाते हुए उन्हें एक साधारण नागरिक मान ताजिन्दगी सरकारी आवासीय सुविधा से वंचित करते हुए इस सम्बंध में बनाये गये कानून को ही निरस्त कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले का असर सभी राजनैतिक दलों पर पड़ेगा क्योंकि इसके दायरे में सभी प्रमुख दलों के राजनेता आते हैं।शीर्ष अदालत ने कहा है कि जब किसी मुख्यमंत्री का कार्यकाल समाप्त हो जाता है तो उसमें और एक आम नागरिक में कोई फर्क नहीं रह जाता है। सरकारी आवास सरकार की सम्पत्ति हैं और इन पर अधिकार सिर्फ सरकारी लोगों का है।प्रदेश में पहले से ही आवासीय समस्या है साथ ही यह व्यवस्था अधिनियम की धारा 3 व 4 के साथ भेदभावपूर्ण एवंअन्याय है इससे समानता खंड का उल्लंघन होता है। शीर्ष अदालत का यह फैसला लोकतांत्रिक हित में जनता की कमाई की लूट पर रोक लगाने जैसा है जो एक ऐतिहासिक सराहनीय स्वागत योग्य है। सरकारी सम्पत्तियाँ देश की सम्पत्ति होती हैं और इनके दुरुपयोग पर रोक लगना लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती देने व उसे संरक्षित करने जैसा है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः -------/ ऊँ नमः शिवाय।।
          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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