Thursday, May 31, 2018

पढ़ाई के महत्व को समझो -भोला नाथ मिश्रा की रिपोर्ट

शिक्षा और विद्या दोनों एक दूसरे एक नजदीक होते हुए भी एक नही मानी जाती हैं क्योंकि दोनों में जमीं आसमां का फर्क होता है।शिक्षा मनुष्य को संसारिक वैज्ञानिक जबकि विद्या वैदिक संस्कारित धर्म एवं इंसानियत पूर्ण जीवन पर अग्रसर करती है।एक समय था जबकि लोग बच्चे को संसारिक वैज्ञानिक शिक्षा के लिए पाठशाला भेजने से पहले उसे गुरुकुल में अध्यात्मिक संत महात्माओं एवं श्रृषियों मुनियों के पास भेजते थे। धर्म संस्कृति की राह पर चलकर पाठशाला में ली गयी शिक्षा मनुष्य को महान और बौद्धिक संपदा से परिपूर्ण धर्म पथ पर चलने लायक बनाती है। आजकल विद्या का अभाव होता जा रहा है और संस्कार विहीन संसारिक शिक्षा लोगों को अपराधिक प्रवृत्ति का बना रही है। आजकल उच्च शिक्षा प्राप्त लोग ही भ्रष्ट दुराचारी आतंकी देशद्रोही बन रहे हैं और गाँव देश समाज को कलंकित कर रहे हैं। हालांकि आधुनिक शिक्षा में एक विषय नैतिक शिक्षा के रूप में भी समाहित है लेकिन गुरु और गुरूमाता के सानिध्य में राजा और रंक दोनों शिष्यों के एक साथ रहने खाने पीने समान कार्य करने संस्कार दया क्षमा एवं ईश्वरीय राह पर चलने वाला नही बना पा रही है। अब संस्कारवान बनाने वाले शिक्षक ही संस्कारविहीन होते जा रहे हैं और संस्कारित वेशभूषा की जगह नये फैशनेबुल सूटबूट ने ले लिया है। अब शिक्षक गुरू जी से टीचर अध्यापक बनते जा रहे हैं।वैदिक शिक्षा के अभाव में ही लोग शिक्षा का दुरपयोग कर शिक्षा को कलंकित कर देश को कमजोर कर रहे हैं। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः -------/ ऊँ नमः शिवाय।।।

           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/ समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।।

No comments:

Post a Comment