Wednesday, May 30, 2018

कैराना और फूलपुर के उपचुनाव में ईवीएम को लगी गर्मी पर विशेष

एक समय था जबकि आम चुनाव मतदाता पेटियों एवं बैलेट पेपर के सहारे होता था।उस समय राजनैतिक दल मतपेटियों और बैलट पेपर में हेराफेरी एवं गड़बड़ी बताकर चुनाव को निरस्त करके दूबारा चुनाव कराने की माँग किया करते थे।लोग राजनैतिक गुण्डों के बल पर मतदान केंद्रों पर कब्जा करके बैलेट पेपरों में  मुहर लगाकर मतपेटियों में डाल लेते थे या मतपेटियां बदल दी जाती थी। अधिकांशतः मतदान केंद्रों पर कब्जा करके फर्जी मतदान करने का आरोप सत्ता पक्ष पर लगाया जाता था जबकि मौका पाने पर कोई भी दल चूकता नहीं था। समय की बचत और फर्जी मतदान पर रोक लगाने के उद्देश्य से ही मतदान करने का स्वरूप बदला गया और मतदान पेटियों व बैलेट पेपरों की जगह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया है। मतपेटियों एवं बैलेट पेपर की व्यवस्था अभी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुयी है और छोटे चुनावों में अभी भी इनका इस्तेमाल किया जाता है। शुरुआत में ईवीएम मशीनों पर  आरोप नहीं लगते थे किन्तु इधर राजनैतिक लोग इन पर भी अँगुली उठाने लगे हैं और पिछले चुनावों में सत्ता दल पर विशेष सेटिंग करने के आरोप लगाकर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश कर चुके हैं। अभी दो दिन पहले सम्पन्न हुये कैराना और फूलपुर में मतदान के दौरान एक बार फिर ईवीएम मशीन चर्चा में आ गयी है।कहा जाता है कि जिस तरह मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण गर्म होकर काम करना बंद कर देते हैं उसी तरह ईवीएम मशीनों और बटन दबाकर मत देने वाला वीवीपैटों का दिमाग गर्म हो गया जिससे उन्होंने काम करना बंद कर दिया। इनमें इवीएम मशीनें तो सिर्फ छः खराब हुयी लेकिन पैट करीब पौने चार सौ खराब हो गये।भाजपा और विपक्ष दोनों इसकी शिकायत चुनाव आयोग से कर चुके हैं। मशीन एवं बटन पैट में खराबी की वजह अत्याधिक गर्मी बताया जा रहा है जबकि पिछले चुनावों की तरह विपक्ष इसे साजिश मान रहा है। उसका मानना है कि वोटिंग मशीन एवं उनके पैट उन्हीं क्षेत्रों में फेल हुये जहाँ पर विपक्ष के मतदाता ज्यादा थे।कुल मिलाकर ईवीएम मशीनों की आड़ में विपक्ष को सत्तापक्ष पर हमला बोलने का सुअवसर मिल गया है और गड़बड़ी वाले मतदान केन्द्रों पर दूबारा मतदान कराने की मांग करने लगे हैं।मतदान के दौरान गर्मी से मशीनों में खराबी आने तथा एक साथ सैकड़ों वीवीपैटों का खराब होना और इसमें विपक्ष को साजिश नजर आना दोनों बातें थोड़ा समझ में कम आती है। मशीन कोई भी हो चाहे इलेक्ट्रॉनिक हो चाहे नान इलेक्ट्रॉनिक हो कभी भी खराब हो सकती है लेकिन एक साथ इतने व्यापक पैमाने पर खराब होना लोगों को आशंकित करने वाला है। यह सही है कि इन मतदान उपकरणों की खराबी होने का विपरीत प्रभाव मतदान पर पड़ा है और मतदान अनुमान से कम हुआ है। हालांकि कम मतदान के पीछे इस समय पड़ रही जानलेवा गर्मी एवं असहनीय तेज धूप भी है।इस समय दस मिनट भी धूप में खड़ा रहना दुश्वार है तो दो दो घंटे लाइन लगकर मतदान करने के लिए मशीनों के ठीक होने की राह देखना सबके वश की बात नहीं है। जहाँ पर मशीने दस पांच मिनट आधा घंटा फेल रही हैं वहाँ नहीं लेकिन जहाँ घंटों फेल रही हैं वहाँ के मतदाताओं को मतदान करने का अवसर मिलना चाहिए। चुनाव आयोग या सरकार के पास इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरों की कमी नहीं है फिर भी इन मशीनों का खराब होना उन इंजीनियरों की जिम्मेदारी पर प्रश्न चिन्ह लगाता है जिन्होंने इन मशीनों एवं मतदान पैड का निरीक्षण इन्हें मतदान केंद्रों पर भेजने से पहले किया था। धन्यवाद।।भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः -----/ ऊँ नमः शिवाय।।
             भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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