Wednesday, May 2, 2018

महीनों से कूड़ा उठाने वाले वाहन लगा रहे रिहाई की गुहार

सहारनपुर स्मार्ट सिटी का लेबल मात्र लिखित दस्तावेजों में ही गुम हो कर रह गया  है। आपके बता दें ।  स्मार्ट सिटी का खाका आधुनिक तथा शहरी विकास की बुनियादों पर टिका हुआ होता है। किंतु सहारनपुर में  तो विकास की उलटी गंगा बह रही है। जैसे 24 घंटे बिजली आपूर्ति नतीजा सिफर, 24 घंटे पानी की लगातार  व्यवस्था नतीजा सिफर, । ऊंची दुकान फीके पकवान वाली कहावत तो आपने सुनी ही होगी। निसंदेह सहारनपुर स्मार्ट सिटी में आ चुका है किंतु सहारनपुर स्मार्ट सिटी को बनाने की एवज में एक तोहफा तो अवश्य ही सहारनपुर वासियों को नगर निगम ने बिना देर किये । तुरंत दे दिया । इस स्मार्ट सिटी में हाउस टैक्स व दुकानों के टैक्स वृद्धि में सभी शहर वासियों का विकास अवश्य हो गया । शहर वासियों के लिये स्मार्ट सिटी का ऐसा तोहफा दिया गया । की रही सही कसर विधुत विभाग ने पूरी कर दी विद्युत बिलों में भी वृद्धि कर शहर के वासियों को एक और झटका दे दिया गया । क्योंकि भाई अब आप सहारनपुर स्मार्ट सिटी में रह जो रहे हैं भले ही स्मार्ट सिटी बनने में विकास को कितने ही वर्षों क्यों ना लग जाएं लेकिन हर चीज़ में भुगतान आपको स्मार्ट सिटी के नाम पर। ही स्मार्ट भुगतान भी करना होगा । भले ही स्मार्ट सिटी की  सुविधाओं  से आप वंचित हों।किंतु विधुत बिलों में वृद्धि तथा दुकानों व मकानों में टैक्स में वृद्धि वाटर टैक्स वगैरा=वगैरा के रूप में आपको एक तोहफा अवश्य मिल गया है । मानो जैसे सहारनपुर  वासियों को  प्रसन्न करने के लिए स्मार्ट सिटी का लेबल चस्पा कर दिया गया हो जबकि हकीकत यह है कि  सहारनपुर नगर निगम की  व्यवस्था  पूरी तरह से ठप होती  दिख रही है।अपने कांधों पर  स्मार्ट सिटी का बोझ उठाये अभी तक तो विकास का ढोंग रचता हुआ फिर रहा है नगर निगम,,,खैर  निगम को जब अपने साज़ो समान की व्यवस्था का ही ख्याल नही है। तो इसका क्या प्रमाण है कि स्मार्ट सिटी का विकास भी स्मार्ट ही होगा । इस मुद्दे को भी आपके समक्ष रखना हमारा कर्तव्य था । अब आते हैं । दूसरे मौज़ू के पहलू पर आपको बता दें । सहारनपुर नगर निगम के कूड़ा उठाने वाले तीन छोटे टेम्पू जो कंडीशन से लगभग ज़्यादा पुराने भी नही लगते हैं । जो पिछले तीन साढ़े तीन माह से तीनों टेम्पू किसी मेंटेनेंस कार्य होने के कारण से वर्कशॉप में खड़े हुए हैं।  मानो जैसे अपनी रिहायी की गुहार लगा रहे हों । सूत्रों के हवाले से अगर बात की जाये तो निगम की ओर से इस वर्कशॉप को टेम्पू के मेंटेनेंस कार्य के लिए नगर निगम की ओर से कुछ पेमेंट भी किया जा चुका है। किंतु नगर आयुक्त की उदासीनता की रवैया की वजह से ऐसा प्रतीत होता है। जैसे कूड़ा ढोने वाले तीनों टेम्पू वर्कशॉप में कबाड़ बनाने के उद्देश्य से छोड़े गये हों । प्रदेश सरकार व टैक्स के रूप में जनता की गाढ़ी कमाई का सर्वनाश धीरे धीरे अवश्य हो रहा है। सवाल अब ये भी है । कि नगर निगम के ज़िम्मेदार महापौर की चुप्पी क्यों नहीं टूटती है। क्यों महापौर भी इस और लापरवाह बने हुए हैं ।सहारनपुर क्षेत्र वासियों को अखबारों के माध्यम से बजट आना तो दर्शा दिया जाता है। किंतु धरातल पर कार्य कितना हो रहा है। और कैसे हो रहा है । ये भी एक बड़े सवाल की और इशारा करता है । बैरहाल लाखों की कीमत के टेम्पू कबाड़ होने की कगार पर पहुंच रहे हैं. रिपोर्ट,अहमद खान, कभी हाल ही में ये टेम्पू सहारनपुर की सड़कों से कूड़े व कचरे का उठाव करते थे. अब ये टेम्पू लावारिस हालत में निगम के सामने बने वर्कशॉप में कबाड़ बनने के लिए खड़े हुए हैं. सूत्र तो ये भी बताते हैं । पूर्व में मंगाये गये । बचे हुए कुछ ई-रिक्शों को गैराज में केवल इसलिए खड़ा किया हुआ है । कि इनमें मामूली सी खराबियां हैं। जैसे किसी का टायर पंचर हुआ है,तो किसी का सेल्फ काम नहीं कर रहा है । इन नये ई-रिक्शाओं में मरम्मत ना करवा कर निगम की घोर लापरवाही की और इशारा करता है । खैर निगम  के सवालों की फेहरिस्त तो काफी बड़ी है । लेकिन पहला सवाल हाल ही में 20 कूड़ा उठाने वाली छोटी गाड़ियों का महापौर व नगर आयुक्त द्वारा उद्घाटन किया गया था।

No comments:

Post a Comment