Monday, May 21, 2018

जनसमस्याएं और उनके समाधान पर विशेष

जनता की विभिन्न समस्याओं का निदान कराना सरकार का उत्तरदायित्व एवं धर्म बनता है और सरकार इस दायित्व का निर्वहन करने का हर संभव प्रयास करती है। कहावत है जब डोली को उठाने और रखवाली करने वाले ही लुटेरे हो तो डोली की इज्ज़त आबरू कौन बचा पायेगा। सरकार समस्याओं का समाधान व्यवस्था से जुड़े अपने अधीनस्थ अधिकारियों कर्मचारियों के माध्यम से करवाती है और उनकी रिपोर्ट पर यकीन करती है। समस्या का निदान कराने वाला जब कर्मठ कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी मिल जाता है तो समस्या का जड़ से निदान हो जाता है और अगर बेईमान रिश्वतखोर लापरवाह मिल जाता है तो समस्या खत्म होने की जगह बढ़ा देता है। सरकार द्वारा जन समस्याओं के निराकरण के लिए अधिकारियों को रोजाना बारह बजे तक कार्यालय में बैठना अनिवार्य कर दिया है।इतना ही नहीं जनसमस्याओं के निदान के लिए दशकों से थाना तहसील दिवसों के आयोजन किये जा रहे हैं और पोर्टल बनाकर समस्याओं को सीधे आनलाइन करने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। जनसमस्याओं के निदान के लिए जिलाधिकारी पुलिस अधीक्षक मंडलायुक्त पुलिस महानिरीक्षक थाना व तहसील दिवसों में क्रमवार आकर अध्यक्षता एवं निरीक्षण कर निस्तारण की समीक्षा एवं सत्यापन किया करते रहते हैं। जनसमस्याओं के निदान के लिए सरकार के सचिवों के साथ मुख्यमंत्री मंत्री तक समय समय पर वीडियो कानफ्रेसिंग करके निस्तारण प्रगति का जायजा लेते रहते हैं। इसके बावजूद समस्याओं का ढेर लगा रहता है। मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार एवं भयमुक्त नारे को  मूर्ति रुप देने वाले कुछ लोकसेवक ही इसमें बाधक बने हुए हैं। आशा के अनुरूप सरकारी तंत्र की कार्यशैली में बदलाव नहीं आया है यही कारण है कि जनसमस्याओं का निदान गुणवत्तापूर्ण नही हो पा रहा है जबकि सभी उच्च अधिकारी बार बार कहते रहते हैं कि निदान इस तरह से हो जिससे फरियादी को बार बार चक्कर न लगाना पड़े। सरकार की मार से बचने के लिए समस्याओं की मानिरटरिंग करने वालों को झूठी रिपोर्ट देने के तमाम मामले सामने आ चुके हैं।अगर समस्याओं का मौके पर निदान कराने वाले ईमानदारी के साथ राग द्वेष से दूर रहकर अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करें तो अधिकांश समस्याओं को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। आज के बदलते भ्रष्टाचार युग में भी हमारे तमाम अधिकारी ईमानदार कर्तव्यनिष्ठ हमारे बीच विद्ममान प्रकाशवान हो रहे हैं और उन्हीं के दम पर कार्यपालिका विधायिका का संचालन हो रहा है। प्रायः जनसमस्याओं का निदान निचले स्तर से होता है और मनमानी लापरवाही कार्य अधिकता के कारण समस्याओं का निदान मौके पर सरकार की मंशा के अनुरूप नहीं हो पा रहा है। ऐसा नहीं है कि पूरा का पूरा सरकारी तंत्र भ्रष्टाचार लिप्त में लिप्त है लेकिन लिप्त होने वालों की संख्या ज्यादा है और यही कारण है कि समस्याओं का निदान गुणवत्तापूर्ण व्यवहारिक न्यायपूर्ण नही हो पा रहा है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः  -/-------/ ऊँ नमः शिवाय।।।

           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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