Tuesday, May 29, 2018

पिता और परमपिता दोनों एक समान-भोला नाथ मिश्रा

पिता इस धरती का प्रत्यक्ष ईश्वर का स्वरूप माना जाता है और परमपिता उसका बृहद रूप होता है। पिता पुत्र के लिये धरती का परमपिता होता है इसीलिए कहा गया है कि जो पिता के रहते हुए भी हर बात का फैसला खुद कर लेता है उसमें पिता कोई हस्तक्षेप नहीं करता है। जिस तरह से परमपिता अपने अच्छे बुरे दोनों बच्चों के प्रति चिंतित रहता है और जो उसके सहारे रहकर जीवन यापन करता है उसका कोई बाँल बाँका नहीं कर पाता है।अपने बच्चों के लिए जिस तरह परमपिता परमशक्ति बन जाता है उसी तरह पिता भी अपने बच्चे के लिए सर्वशक्तिमान बन जाता है। इसीलिए कहा जाता है कि जो परमपिता के बताये मार्ग पर चलता है और अपना दुख सुख उसके चरणों की समर्पित कर देता है उसकी रक्षा वह स्वयं करता है। जो पिता को सर्वशक्तिमान मानकर अपने साथ हुये अन्याय की शिकायत उससे करता है तो पिता परमपिता की भूमिका निभाने के लिए कुछ देर के लिए वह भूल जाता है कि अन्याय करने वाला उससे अधिक शक्तिशाली है। जो मनुष्य अपने साथ हुये अन्याय का जबाब खुद न देकर उसकी शिकायत पिता से करता है तो पिता उसके लिए जान तक न्यौछावर कर देता है। जिस तरह परमपिता जगत का पालनहार पोषक संरक्षक होता है उसी प्रकार पिता भी अपने बच्चे का पालक पोषक और संरक्षक की भूमिका निभाता है।परमपिता को प्रसन्न करने के लिए पिता का प्रशंसक होना जरूरी होता है। जो अपने पिता माता को प्रसन्न नहीं रख सकता है तो वह परमपिता परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकता है।इसीलिए सुबह माता पिता का आशीर्वाद लेने के बाद ही ईश्वर की पूजा अर्चना की जाती है और गणेश जी ने माता पिता को पूरी सृष्टि मानकर उनकी परिक्रमा की थी।अगर पिता परमपिता के बताये मार्ग पर न चलकर अनीति के रास्ते पर चलता है तो ऐसे पिता के बताये मार्ग का अनुसरण नहीं करना चाहिए।भक्त प्रहलाद इसके प्रत्यक्ष उदाहरण है जिन्होंने ईश्वरीय विधान के विपरीत अपने को ईश्वर मानकर अपनी पूजा करवा रहा था। पिता या परमपिता दोनों एक समान होते हैं और फर्क एक.होता है कि एक अप्रत्यक्ष तथा एक अप्रत्यक्ष रहता है।इसीलिए माना जाता है कि माता पिता की सेवा करके परमपिता परमेश्वर तक पहुंचा जा सकता है और अपने अंधे माता पिता को कंधे पर बिठाकर यात्रा कराने वाले श्रवणकुमार इसके उदाहरण हैं।धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब /शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः ---------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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