Monday, May 14, 2018

मां की ममता और उसकी उपेक्षा पर मदर्स डे भोला नाथ मिश्रा की कलम से

इस समय माता पिता के तिरस्कृत करके उन्हें वृद्धावस्था आश्रम भेजने तथा उन्हें दूर रहने प्रताड़ित तिरस्कृत करने का दौर चल रहा है।स्थिति इतनी भयावह होती जा रही है कि सरकार माँ बाप को प्रताड़ना एवं तिरस्कार के कानून बनाना पड़ गया है और बदलती परिस्थितियों के मद्देनजर कानून में संशोधन करके माँ बाप को संरक्षित करने के लिए सजा तीन से बढ़ाकर छः माह करनी पड़ गयी है।आज के दौर में वही माता पिता तिरस्कृत बहिष्कृत अपमानित हो रहे हैं जो हमें पैदा करके तथा पाल पोसकर हमें सिर उठाकर चलने लायक बनाते और अपनीं सारी ताकत जवानी बुढ़ापा और कमाई न्यौछावर कर देते हैं। अभी कल मदर्स डे था यानी माँ का दिन मनाया गया। मीडिया में भी इस पर चर्चा हुयी और सोशल मीडिया पर तो माँ के की हमदर्दी में तरह तरह श्लोगन एव समर्पण भाव व्यक्त किए गए। लगा कि सारा संसार माँ का परम भक्त और माँमय हो गया है। कहते हैं कि ब्रह्मा विष्णु महेश की उत्पत्ति से पहले माँ के रुप की उत्पत्ति हुई है और माँ ने ब्रह्मा विष्णु महेश की उत्पत्ति इस सृष्टि की रचना के लिए की थी।माँ  मनुष्य एवं पशु पक्षियों जानवरों की उत्पत्ति का माध्यम बनती है और माँ के आँचल में सारा संसार और गगन समाया होता है।कहते कि माता कभी भी अपने बच्चे के लिए कुमाता नही होती है।माँ के बिना संसार का उत्पत्ति नहीं हो सकती है और वही इस जीवन के अवतरण का एकमात्र विकल्प है। बिना के कोई पिता नहीं बन सकता है इसलिए माँ को अधिष्ठात्री देवी का कहा जाता है। माँ महालक्ष्मी का स्वरुप मानी लाती है और जिस घर में रहती है उसमें कोई कमी नही रहती है। कहते हैं कि जिस तरह बिना बरसात के धरती की प्यास नही मिटती है उसी बिना माँ के खाना परोसे मनुष्य का पेट नहीं भरता है। माँ एक ऐसी होती है जो कभी अपनी चिंता नहीं बल्कि बच्चे के प्रति हमेशा चिंतित रहती है।माँ चाहे तो बच्चे को राम और माँ चाहे तो रावण बना सकती है। एक माँ की शक्ति थी कि ब्रह्मा विष्णु महेश को माता अनुसूइया के पालने में खेलना पड़ा।माँ कभी अपने बच्चे के अवगुणों पर ध्यान नहीं देती है और पुत्र प्रेम में अंधी हो जाती है। माँ की ही आँखें ऐसी होती है जिसे साठ साल का बुढा पुत्र भी बच्चा दिखाई पड़ता है।माँ की महिमा का बखान ब्रह्मा विष्णु महेश भी नही कर सकते हैं। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभातम / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः ------/ ऊँ नमः शिवाय।।
          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी, यूपी

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