Monday, June 11, 2018

सीबीआई जांच के बाद धूमिल होती लोक सेवा आयोग की छवि

व्यवस्थापिका के सफल संचालन में प्रशासनिक अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और उन्हीं के सहारे सरकारी तंत्र चलता और लोकोपयोगी सरकारी कार्यों की देखभाल एवं योजनाओं को मूर्ति रूप दिया जाता है। इन जिम्मेदार अधिकारियों का चयन सरकार लोकसेवा आयोग के माध्यम से कराती है जहाँ पर प्रतिभाओं की कद्र की जाती है और माना जाता है कि यहाँ पर भेदभाव मुंहदेखी नहीं होती है और रिश्वतखोरी हेराफेरी जैसी नीच हरकतें नहीं होती है। जो लोग इस लोकसेवा आयोग की परीक्षा को पास कर लेते हैं उन्हें सर्वश्रेष्ठ माना कर उनका आदर किया जाता है और उन्हें बहुप्रतिभाशाली कुशल माना जाता है। 2000से 2004 तक उ०प्र० लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष रह चुके प्रोफेसर के०बी पाण्डेय कहते हैं कि उनके समय में प्रतियोगी आयोग को मंदिर की तरह पाक साफ मानते थे और इस संस्था में बेइमानी होने की कल्पना तक नहीं की जाती थी। आयोग के लिये सभी प्रतियोगी एक समान बेटे के रूप में होते थे। इधर हमारी स्वार्थवादी नीति के चलते लोकसेवा आयोग भी आरोपों ,संदेहों और विवादों के घेरे में आ गया है । यह पहला अवसर होगा जबकि आयोग की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगे है और उसके क्रियाकलापों की जाँच देश की सर्वोच्च जाँच एजेंसी सीबीआई से कराई जा रही है।यह लोकसेवा आयोग के इतिहास में एक काला अध्याय होगा जबकि उसकी विश्वसनीयता पर काला धब्बा लगा है। सीबीआई 2012 से 2017 तक के कार्यकाल में आयोग के माध्यम से हुयी विभिन्न पदो की भर्तियों में की गयी मनमानी धूर्तता की जाँच कर रही है। इस जाँच के दायरे में 538 भर्तियाँ आती हैं जिनके जरिये करीब 40 हजार पदों को भरा गया है।इनमें अधिकांश पद सीधी भर्ती के हैं और इनमें पीसीएस के तकरीबन तीन हजार तथा पीसीएस-जे के एक हजार पद हैं। वर्ष 2013 में पहली बार आयोग की जाँच कराने की माँग की गयी थी और मुख्यमंत्री योगीजी ने जुलाई17 में सीबीआई जाँच कराने की घोषणा की थी। इसके बाद जुलाई17 में कैबिनेट ने इस इस मुहर लगाई थी एवं 31 जुलाई को जाँच कराने की संस्तुति केन्द्र के पास भेजा था। जनवरी18 में सीबीआई ने लखनऊ में केस दर्ज कराकर 31 जुलाई को जाँच अधिकारी अपनी टीम के साथ पहली बार आयोग पहुंचे थे। सीबीआई ने जाँचोंपरान्त 5 मई 18 को इन भर्तियों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज करा चुकी है। प्रारम्भिक जांच के दौरान कई तथ्य ऐसे मिले हैं जिनसे भर्तियों में घपलेबाजी के संकेत मिलते हैं। दुखद तो यह है कि गौरवशाली सम्मानित अतीत वाले लोकसेवा आयोग की प्रतिष्ठा राजनैतिक भ्रष्टाचार की बलि चढ़कर रसातल में पहुंच गयी है। इधर कुछ दशकों में भ्रष्टाचार इस कदर व्याप्त हो गया कि न्यायालय और लोकसेवा आयोग भी इसकी चपेट में आने लगे हैं जो भविष्य के लिए उचित नहीं हैं क्योंकि कहा गया है कि स्वार्थ में अंधा होने का मतलब भविष्य को खतरे में डालने जैसा होता है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः ------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
            भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/ समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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