Tuesday, June 12, 2018

नदियों में कृतिम बाढ़ औऱ बचाव राहत के नाम पर खुला खेल

मानसून से होने वाली बरसात जहाँ लोगों के लिए वरदान होती है वहीं पर कभी कभी यह अभिशाप बन जाती है और नदियों के किनारे आसपास बसे गाँवों के लोगो के लिए मुसीबत का सबब बन जाती है। वैसे इधर दो दशकों से हमारे यहाँ मानसूनी बरसात इतनी नहीं होती है जिससे नदियों में बाढ़ आ जाय इसके बावजूद हर साल कृतिम बाढ़ जरूर आती है जिसमें जन एवं धन दोनो नुकसान होते हैं। सबसे ज्यादा तबाही तो उस समय आती है जबकि बाढ़ विभीषिका से बचाव के लिए बनाये तटबंध टूट जाते हैं और नदी का पानी आबादी में घुसकर बरबादी और मौत का तांडव करने लगता है।यह कृतिम बाढ़ घाघरा जैसी उन नदियों में आती है जो नेपाल से जुड़ी होती है। नेपाल और भारत के मध्य बना बनबसा बाँध का पानी इधर हमारे  प्रदेश में हर साल लाखों लोगों को दाने दाने का मोहताज बना देता है। नेपाल से आने वाला पानी दशकों पहले दोनों देशों के मध्य हुये एक समझौते के तहत बरसात में छोड़ा जाता है जिससे अरबों का नुकसान होता है और बाढ़ बचाव राहत के नाम पर सरकारी खजाना खाली होता है। अगर बनबसा बाँध का पानी न छोड़ा जाय तो नेपाल में भंयकर तबाही हो सकती है और उसके असित्व पर खतरा आ सकता है। हमारी सरकार तराई क्षेत्र से जुड़े लोगों को बाढ़ से बचाने तथा प्रभावित लोगों को सहायता देने के नाम हर साल अरबों रुपये खर्छ करती है फिर वह बरबादी को नहीं रोक पाती है।बाढ़ बचाव राहत योजना हरामखोर अधिकारियों और राजनेताओं के लिए एक चारागाह बन गयी है और फलस्वरूप अक्सर तटबंध टूटते रहते हैं। बाढ़ बचाव एवं नियन्त्रण के लिये बनाये गये सरकारी विभाग की गैर जिम्मेदाराना हरकतें और उसकी खाँऊ कमाऊँ नीति के चलते हर साल सरकारी खजाना खाली होता है। बाढ़ बचाव विभाग बरसात से पहले अपने तटबंधों को मजबूत नहीं करता है बल्कि जब बरसात शुरू हो जाती है तो वह मरम्मत के नाम खानापूरी करता है। विभाग इन तटबंधों को टूटने का अवसर देता है क्योंकि जितना बड़ा स्टीमेट होता है उतना ही बड़ा बजट आता है इसीलिए विभाग बड़े बजट के लिये तटबंध को जानबूझकर टूटने लायक कर देता है।जितना पैसा बाढ़ पीड़ितों को नकदी खाद्य सामग्री आदि के नाम पर खर्च होता है उससे अधिक बाढ़ बचाव के नाम पर खर्च हो जाता है।अगर बरसात शुरू होने से पहले ही इन तटबंधों को ठीक करके बाढ़ के समय इनकी निगरानी की जाय तो इन तटबंधों को टूटने एवं तबाही से बचा जा सकता है। सरकार ने इस तरफ ध्यान दिया है और दो महीने पहले से ही इन तटबंधों का निरीक्षण शुरू कर दिया है और बरसात से पहले ठीक करने के निर्देश दिये हैं।सरकार के इस निर्देश का कितना प्रभाव बाढ़ बचाव राहत विभाग और उससे जुड़े अधिकारियों कर्मचारियों पर पड़ता है यह तो आने वाला समय बतायेगा। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः ----------/ ऊँ नमः शिवाय।।।

          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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