Sunday, June 17, 2018

सरकार के अमन के सन्देश के बावजूद जम्मू कश्मीर में हालात बदतर

जम्मू कश्मीर के हालात सुधर नहीं रहे हैं बल्कि दिनों दिन बिगड़ते जा रहे हैं। सरकार भले ही दावा कर रही हो कि रमजान दौरान बंद किये सैनिक अभियान से हालात में सुधार हुआ है और पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आई है। लेकिन सरकार यह दावा अपनी पीठ खुद थपथपाने जैसा है क्योंकि हमारे पड़ोसी दुश्मन देश की आतंकी हरकतों पर इस सहिष्णुता एवं सीजफायर का कोई असर नही पड़ा है बल्कि उसे एक हमला करके आतंक फैलाने का एक सुनहरा अवसर मिल गया है। हमारे पड़ोसी के लिए वह कहावत चरितार्थ होती है कि-"जाति स्वाभाव कबौ न छूटै कुकुर टांग उठायकै------"।पड़ोसी पाकिस्तान और उसके द्वारा उत्पादित संरक्षित पालतू आतंकियों पर रहम करना साँप को आस्तीन में पालकर उसे दूध पिलाने जैसा ही। सरकार ने भले ही काश्मीरियों को रमजान में अमन का पैगाम देने के लिए सैनिक अभियान रोका हो लेकिन अमन के नाम पर वहाँ पर बेगुनाहों का खून बहाने का दौर शुरू हो गया है जो थमने का नाम नहीं ले रहा है।लगातार आतंकी हमले हो रहे हैं लेकिन सरकार मानवता के नाम पर अभी सैनिक अभियान की समीक्षा कर रही है। सरकार भूल रही है कि जो सद्भावना का संदेश देने के लिए रमजान के पाक माह में जो सैनिक अभियान को रोका गया था उसे पड़ोसी और उसके आतंंकियों ने ठुकरा दिया है। इतना ही नहीं बल्कि नीचता की सारी हदें पार हो गयी हैं और ईद मानने अपने घर जा रहे एक हमारे एक फौजी जवान का अपहरण करके जहाँ हत्या कर दी है वहीं एक अमनपसंद राष्ट्रप्रेमी कलम के सिपाही काश्मीरी के जाने माने पत्रकार शुजात बुखारी का रोजा इफ्तार करने के लिए घर जाते समय उनके सुरक्षा गार्डों के साथ गोलियों से भून कर नृशंस हत्या कर दी गई।इस घटना की जाँच एसआईटी को सौंपी गई है और उसने बुखारी तथा उनके साथ मारे गये उनके सुरक्षा गार्डो की एक पिस्तौल के साथ एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए हमलावर से पूंछतांछ की जा रही है।अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि बुखारी की जान किसने ली है लेकिन इस दिशा में सफलता के आसार हैं। यह तय है कि पत्रकार बुखारी की हत्या सरेआम सरेबाजार उन्हीं लोगों ने की है जो वहाँ की सद्भावना को वापस नहीं आने देना चाहते हैं और लगातार अशांति बनाये रखना चाहते हैं। पत्रकार बुखारी अमनपसंद और अमन के लिये सक्रिय ही नहीं थे बल्कि वह उन वरिष्ठ लोगों में थे जो पाकिस्तान से हुयी ट्रैक-टू वार्ता टीम में शामिल थे। उन्होंने सरकार की रमजान में की गयी पहल का स्वागत किया था और अपने को भारतीय मानते थे।हम वरिष्ठ पत्रकार एवं उनके सुरक्षा गार्डों की हत्या की पत्रकार समाज की तरफ से निंदा करते हैं और उनकी मृतात्मा की शांति एवं इस दुखद घड़ी में परिजनों को साहस प्रदान करने के लिए ईश्वर से कामना करते हैं।हम सरकार से राष्ट्रप्रेमी अमन पसंद जम्मू कश्मीर से जुड़े कलम के सिपाहियों एवं उनके परिजनों की बेहतर सुरक्षा प्रदान करने का अनुरोध करते हैं।साथ ही साथ इस बार सैनिक अभियान को तबतक न रोका जाय जबतक आतंंकियों एवं उन्हें सरंक्षण देने वालों का पूर्णरूपेण सफाया न हो जाय।धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः -------/ ऊँ नमः शिवाय।।।

           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/ समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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