Wednesday, June 13, 2018

मनुष्य के जीवन मे भक्ति से होते है चमत्कार

मनुष्य जीवन में भक्ति का बहुत महत्व होता है और भक्ति विहीन मनुष्य होते हुए भी मनुष्य नही बन पाता है। भक्ति को जीवन का आधार स्तंभ भी माना जाता है क्योंकि भक्ति के जीवन का मूल आधार मानी जाती है। गृहस्थ योनि में भक्ति का प्रवेश जन्म लेने के कुछ समय या कुछ दिनों बाद होने लगता है और बच्चे की भक्ति माता के प्रति हो जाती है और वह बिना माता के रह नहीं पाता है।माता ही उसके चीखने चिल्लाने आँसू बहाने पर रोक लगाकर हँसाती है। दूसरी भक्ति पिता के प्रति होती है और पिता पुत्र के दुख से और खुशी से खुश होता है तथा पुत्र के कष्ट निवारण के लिए अपनी जान की बाजी लगा देता है। मनुष्य जीवन में तीसरी भक्ति गुरु के प्रति होती है और गुरू अपने शिष्य के जीवन को संस्कारित परिष्कृत करके ईश्वर मय बना देता है।माता पिता और गुरु के बाद मनुष्य जीवन भक्तिमय होकर अंत में आत्मा का परात्मा मिलन होकर आवागमन से मुक्ति मिल जाती है। कहते हैं कि मनुष्य जीवन भक्ति का जब प्रवेश होता है तो सभी जीव एक समान दिखाई देने लगते हैं और कण कण में ईश्वर या मालिक दिखाई देने लगता है। भक्ति जिसमें प्रवेश करती है तो वह सुद्ध बुद्ध भूलकर मीराबाई की गली गली प्रभु का गुणगान करने लगता है। वह कबीर तुकाराम संत रविदास आदि बनकर मानवता व ईश्वरीय भक्ति की पराकाष्ठा पर पहुंच जाता है। भक्ति जब भोजन में प्रवेश करती है तो वह भोजन भक्तिमय होकर "प्रसाद “बन जाता है।इसी तरह भक्ति जब भूख में प्रवेश करती है वह भूख ” व्रत अनुष्ठान ”बन  जाता है।भक्ति जब पानी में प्रवेश करती है तो वह पाना पावन ” चरणामृत ”बन जाता है। भक्ति जब मनुष्य जीवन की यात्राओं में प्रवेश कर जाती है तो वह यात्रा या सफर ”तीर्थयात्रा ”बन जाता है।कहते हैं कि मनुष्य जीवन में भक्ति जब संगीत में प्रवेश करती है तो वह संगीत माँ सरस्वती की बीणा का वादन सुर बनकर "कीर्तन भजन सबद सूफियाना कौव्वाली ” बन जाता है।भक्ति जब घर में प्रवेश करती है तो "घर ” ईश्वर का मन्दिर” बन जाता है। कहते हैं कि जब भक्ति जब कार्य में प्रवेश करती है तो वह "कार्य ” सदकर्म ”बन जाता है। भक्ति जब क्रिया में प्रवेश करती है तो वह कार्य “सेवा ”बन जाता है और जब मनुष्य में भक्ति का प्रवेश होकर जीवन भक्तिमय हो जाता तो वह उसे मानव से देवमानव महामानव बना देती है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः ---------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
            भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/ समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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