Sunday, June 3, 2018

पत्रकार को मिल रही जान से मारने की धमकी अब सच लिखना भी हुआ गुनाह

इटिंयाथोक-गोण्डा एक तरफ सरकार पत्रकारो की सुरक्षा का भरोसा देती है तो वही बेलगाम थानाप्रथारी नही सुन रहा पीडित पत्रकार पवन दूबे की फरियाद। ऐसे में सरकार द्वारा पत्रकारो को दिये गये भरोसे को थाना प्रभारी ही पलीता लगाने पर तुले हुए है। ऐसे में सरकार एंव थानाप्रभारी के दावे की पोल खुल है। जब पत्रकार ही सुरक्षित नही और उसका रजिस्र्टड प्रार्थना पत्र थानाप्रभारी की लचर कार्यशैली की बदौलत धूल खा रहा है ऐसे में सरकार एंव पुलिस के उच्चाधिकारियो के पत्रकार के प्रति सुरक्षा के दावे समाज के लिए यक्ष प्रश्न बना हुआ है। मामला पत्रकार पवन दूबे निवासी इटिंयाथोक गोण्डा की है। जिसमें पीडित पत्रकार का जमीनी विवाद वर्षो से चल रहा । जिसमें पीडित पत्रकार के बडे पिता जिनकी कोई संतान नही था और वे पवन दूबे के ही साथ रहते थे । पवन दूबे के बडे पिता जी सेवा भाव से खुश होकर पवन के नाम रजिस्र्टड वसीयत कर दी। पीडित के बडे पिता जी के देहान्त के उपरान्त पीडित ने राजस्व न्यायालय में नामान्तरण के लिए दावा दाखिल कर दिया। इसी रंजीश को लेकर विपक्षी सुरेश कुमार दूबे पुत्र रामअभिलाख,सुनील कुमार पुत्र सुरेश कुमार,सुशील कुमार व राजेश दूबे प्रधान प्रतिनिधि निवासी ग्राम इटिंयाथोक ने साजिश रच आये दिन गाली-गलौज व मारपीट करते रहते है। यही नही विपक्षी तो यह भी धमकी भी देते रहते की मेरा सासंद व विधायक सहित उच्चाधिकारियो से अच्छे संम्बन्ध है। मै धन-बल की बदौलत तुम्म्हारे खिलाफ फर्जी मुकदमा लिखा, तुम्हे जेल भेजवा दूगां। पीडित पत्रकार ने जब इस सम्बन्ध में थाना प्रभारी को प्रार्थना पत्र देकर कार्यवाही की मांग कर रहा। पीउित पत्रकार की जब थाने पर सुनवायी नही हुई तो पीडित पत्रकार ने इस समबन्ध में पुलिस अधीधक को रजिस्र्टड प्रार्थना पत्र देकर तथा व्यक्तिगत मुलाकात कर अपनी फरियाद की। परन्तु दुर्भाग्य वाह रे सरकारी मशीनरी व सरकार के कारिन्दे पुलिस विभाग न्याय तो देना दूर की बात प्रार्थना पत्र पर जांच कर कार्यवाही भी करना उचित नही समझा। क्या ऐसे में पुलिस आमजनमास में अपना विश्वास कायम रख पायेगा ? जब पुलिस पत्रकार की नही सुन रहा तो ऐसे में आमजनमानस के साथ कैसे न्याय कर पायेगा ? क्या सरकार द्वारा पत्रकार सुरक्षा के दावे बेमानी है ? यदि नही तो सरकार को ऐसे बेलगमाम अधिकारियो के खिलाफ सख्त कार्यवाही करना होगा।  यह वही पुलिस है जब कोई उच्चपदो पर बैठा व्यक्ति या राजनैतिक पकड का व्यक्ति मात्र एक फोन कर दे और तुरन्त एफआईआर दर्ज। और किसी पीडित की वास्तविक घटना को भी पुलिस अनदेखी करना पुलिस की कार्यशैली बनता जा रहा। यानि पुलिस की कार्यशैली आमजनमानस के प्रति अलग और उच्चाधिकारी व राजनैतिक पहुच या धनबल की लालच दे पुलिस कर्मियो को मुह मांगी रकम देने वाला सबसे अच्छा व्यक्ति। यही नही ऐसा व्यक्ति चाहे लाख् गलत हो पुलिस की नजरो में वही गलत कार्य तुरन्त सही हो जाता । ऐसे में कैसे हो आमजनमानस में पुलिस का भरोसा कायम यह यक्ष प्रश्न सदैव खडा होता रहेगा ? यदि समय रहते पुलिस के उच्चाधिकारी ऐसे बेलगाम थान प्रभारीयो के खिलाफ सख्त नही हुई तो ऐसे अनगित अनैतिक कार्य आये दिन होते रहगें । और रही बात सरकार की तो सरकार को ऐसे में दोबारा सत्ता पाने में एडी चोटी के जोर लगाने पर भी अंन्त में हार का ही सामना करना पडता है ? ऐसे में सरकार को इन पर पैनी नजर रख सख्त कदम उठाने की जरूरत है। जिससे आमजनमानस की सरकार एंव सरकारी मशीनरी के प्रति भरोसा कायम रहे। 

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