Friday, June 22, 2018

आज के दौर में योग और आयुर्वेद की बढ़ती मांग पर विशेष वरिष्ठ सम्पादक भोला नाथ मिश्रा की कलम से

स्वस्थ निरोगी काया के लिये मनुष्य जीवन में व्यायाम योग का बहुत महत्वपूर्ण स्थान होता है।इसीलिए इसे जीवन से जोड़ कर मनुष्य के जरूरी बना दिया गया है। व्यायाम योग जीवन को निरोग बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। योग व्यायाम की परम्परा कोई नयी नहीं है बल्कि इसका महत्व आदिकाल से है और इसका प्रचलन तीनों युगों एवं श्रृषि मुनियों तक में रहा है। जब बच्चा पैदा होता है तो उसकी मालिस के नाम पर माँ बच्चे से योगा कराती है और जब बड़ा हो जाता है तो गाँव में पहले लगने वाले अखाड़े में जाता था और डंड बैठक और शीर्षासन जैसे योग करता है।जब बच्चा बड़ा होकर स्कूल जाता है तो वहाँ पर व्यायाम के नाम पर पीटी और खेलकूद होते हैं।तमाम लोग ऐसे हैं जो रोजाना किसी न किसी रुप में योगाभ्यास करते हैं।आज बदलते समय में रहन सहन और खानपान इतना प्रदूषित हो गया है कि तरह तरह की बीमारियां फैल रही हैं। हमारी एलोपैथी चिकित्सा पद्धति इतनी महंगी हो गई है कि गरीब की मौत उचित चिकित्सा सुविधा के अभाव में हो जाती है। मनुष्य योगाभ्यास करके हष्ट पुष्ट निरोग ही नहीं बल्कि तमाम बीमारियों से निजात पा सकता है। इसीलिए योगाभ्यास को सभी बीमारियों की दवा और आयुर्वेद का मौसेरा भाई बताया गया है। योग और आयुर्वेद का गहरा रिश्ता है तथा कठिन से कठिन बीमारियों का इलाज योग और आयुर्वेद से किया जा सकता है। योग और आयुर्वेद दोनों मुफ्त में मिल सकते हैं जबकि अन्य चिकित्सा पद्धतियों में पैसा लगता है। एलोपैथी चिकित्सा आज इतनी महंगी हो गई है कि सबके बलबूते की बात नहीं है। इधर आयुर्वेद और योग दोनों लुप्त हो गये थे यहाँ तक कि स्कूलों में पीटी के घंटे में छुट्टी दे दी जाती थी। इधर योग और आयुर्वेद दोनों का महत्व एक बार पुनः बढ़ा है तथा लोग एलोपैथ की जगह योगा और आयुर्वेद का सहारा लेने लगे हैं। हमारे बेहद खुशी है कि हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी के प्रयासों से योगा को विश्व स्तर पर पहचान मिली है और इक्कीस जून को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के रुप में मनाया जाने लगा है।बाबा रामदेव जी ने योगा और आयुर्वेद के विस्तार की दिशा में एक सराहनीय पहल की है।योगासन एक बार फिर अपने सबाब पर पहुंचने लगा है और जगह जगह योगाभ्यास केन्द्र खुलने लगे हैं। सभी चिकित्सा पद्धतियों से निराश लोग योगा और आयुर्वेद की ओर आकर्षित होने लगे हैं। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् /गुडमार्निंग / नमस्कार / अदाब / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः ---------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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